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Sushil Sarna's Blog – June 2022 Archive (6)

पाँच दोहे मेघों पर. . . . .

पाँच दोहे मेघों पर . . . . .

अम्बर में विचरण करे, मेघों का विस्तार  ।

सावन की देने लगी, दस्तक अब बौछार ।।

मेघों का मेला करे, अम्बर का शृंगार ।

आज दिवाकर लग रहा, थोड़ा सा लाचार ।।

थोड़ी सी है धूप तो, थोड़ी सी बरसात ।

अम्बर में  आदित्य को, बादल देते मात ।।

बादल नभ को चूमते, पहन श्वेत परिधान ।

हंसों की ये टोलियाँ, आसमान की शान ।।

नील वसन पर कर दिया, मेघों ने शृंगार ।

धरती पर चलने लगी, शीतल मस्त बयार…

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Added by Sushil Sarna on June 24, 2022 at 2:30pm — 6 Comments

हंसगति छन्द. . . . .

हंसगति छन्द. . . .(11,9)

जले  शमा  के   साथ, रात   परवाने ।
करें   इश्क  की  बात, शमा   दीवाने ।
दिल को दिल दिन-रात, सुनाता बातें ।
आती रह -रह याद, तन को  बरसातें ।
                  * * * *
बिखरी-बिखरी ज़ुल्फ,कहे अफसाने ।
तन्हा - तन्हा   आज,  लगे   मैख़ाने  ।
पैमानों   से   रिन्द ,  करें   मनमानी  ।
अब  लगती  है  जीस्त , यहाँ बेमानी ।

मौलिक एवं अप्रकाशित 

सुशील सरना / 23-6-22

Added by Sushil Sarna on June 23, 2022 at 1:14pm — No Comments

दोहा पंचक. . .

दोहा पंचक. . . . .

अद्भुत है ये जिंदगी, अद्भुत इसकी प्यास ।

श्वास-श्वास में आस का, रहता हरदम वास ।।

श्वास-श्वास में  आस का, रहता हरदम वास ।

इच्छाओं की वीचियाँ, दिल में करतीं रास ।।

इच्छाओं की वीचियाँ, दिल में करतीं रास ।

जीवन भर होती नहीं, पूर्ण जीव की आस ।।

जीवन भर होती नहीं, पूर्ण जीव की आस ।

अन्तकाल में जिन्दगी, होती बहुत  उदास ।।

अन्तकाल में जिन्दगी, होती बहुत उदास ।

अद्भुत है ये जिंदगी, अद्भुत…

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Added by Sushil Sarna on June 22, 2022 at 6:12pm — 8 Comments

पितृ दिवस पर कुछ क्षणिकाएँ. . .

पितृ दिवस पर कुछ क्षणिकाएँ ....

काँधे को
काँधे ने
काँधे दिया
इक अरसे के बाद
सृष्टि रो पड़ी
.........................
छूट गया
उँगलियों से
उनका आसमान
इक नाद बनकर रह गया
इक नाम
पापा
............................
पापा
पुत्र का आसमान
पुत्र
पिता का अरमान
एक छवि एक छाया
एक जान
एक पहचान

सुशील सरना / 19-6-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on June 19, 2022 at 8:28pm — 4 Comments

मुक्तक ( आधार छंद - हंसगति )

मुक्तक

आधार छंद हंसगति  (11,9 )

प्रीतम   तेरी  प्रीत , बड़ी   हरजाई ।

   विगत पलों की याद, बनी दुखदाई ।

      निष्ठुर  तेरा  प्यार , बहुत  तड़पाता -

           तन्हाई में  आज, आँख  भर  आई ।

                        * * *

दिल से दिल की बात, करे दिलवाला ।

    मस्ती  में  बस  प्यार , करे  मतवाला ।

        उसके ही बस गीत , सुनाता  मन  को -

             पी कर हो  वो  मस्त , नैन  की  हाला ।

सुशील सरना / 15-6-22

मौलिक एवं…

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Added by Sushil Sarna on June 15, 2022 at 11:44am — 4 Comments

कौन है वो. . . .

कौन है वो ......

उनींदीं आँखें
बिखरे बाल
पेशानी पर सलवटें
अजब सी तिश्नगी लिए
चलता रहता है
मेरे साथ
मुझ सा ही कोई
मेरी परछांईं बनकर
कौन है वो
जो
मेरे देखने पर
दूर खड़ा होकर
मुस्कुराता है
मेरी बेबसी पर

सुशील सरना / 5-6-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on June 5, 2022 at 12:15pm — No Comments

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