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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – April 2018 Archive (1)

मूर्ख दिवस के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर

सूँघा हमने फूल को, महज समझ कर फूल

था कागज का तो मना, अपना 'अप्रैल फूल'।१।



हम में  दस  ही  मूर्ख हैं, नब्बे  हैं  हुशियार

लेकिन ये दस कर रहे, हर दुख का उपचार।२।



मूरख कब देता भला, मूर्ख दिवस को मान

 इस पर कृपा कर रहा, सहज भाव विद्वान।३।



भोले भाले का उड़ा, खूब कुटिल उपहास

मूर्ख दिवस पर सोचते, वो हैं खासमखास।४।



दसकों से सर पर रहा, बेअक्लों  का…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 1, 2018 at 7:28am — 20 Comments

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