For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Shyam Mathpal's Blog – March 2015 Archive (6)

सच

हर फूल खुश्बू नहीं देता,हर कली  फूल नहीं बनती           

हर चमकता रात  में तारा नहीं होता ,हर चमकता पत्थर हीरा नहीं होता

जरा संभल के मेरे दोस्त हर बात सच्ची नहीं होती

हर मीठा स्वर अच्छा नहीं होता, हर खड़ी जीज सहारा नहीं होती,

हर खून का रिश्ता अपना नहीं होता ,हर दोस्त सच्चा नहीं होता .

जरा सभंल........

हर रात काली नहीं होती,हर दिन उजाला नहीं होता,

हर रात दिवाली नहीं होती, हर रोज होली नहीं होती.

जरा संभल......

हर लाल कपड़ा कफ़न नहीं…

Continue

Added by Shyam Mathpal on March 26, 2015 at 8:44pm — 14 Comments

आज़ादी

मन के कमरे में कैद हमारे भाव विचार

बने वाणी के मोती ,कलम की बहती धार

सुवासित हो फ़िज़ा ,पढ़े सुने संसार

बुने सतरंगी सपने,बरसे प्यार की फुहार

डूबे खुश्बुओं में ,सुगन्धित हो बहार

खुशिओं के फूटे झरने ,भीगें बार -बार

मिले जीने की उमंग,सपना हो साकार

भूल सारे गम ,नव अंकुर का आधार

चाहतों की संतुष्टि ,आशीष से सरोबार

खुले परिचय के द्वार ,जुड़ा नया परिवार

धन्य हो गए हम ,दिलों के जुड़े तार

भूल जोड़ बाकी का गणित ,मिला जीने का…

Continue

Added by Shyam Mathpal on March 18, 2015 at 11:50am — 12 Comments

क्षणिकाएँ

प्रणाम      

 

देश के वीरों को प्रणाम

उन शहीदों को सलाम

हमारे कल के लिए नव कोपलों का बलिदान

माताओं ने किये बेटे कुर्बान

बहिनों ने दिया सुहाग का दान

सदियों सदा याद रखेगा हिंदुस्तान

 

संतान

 

देश के लिए जान दे

देश भक्ति का ज्ञान दे

राष्ट्र भाषा को मान दे

माँ ऐसे संतान दे.

 

आंसू

 

आंसुओं को यों ही पीते रहे

होंठों…

Continue

Added by Shyam Mathpal on March 16, 2015 at 4:00pm — 18 Comments

हालात

सपनो  को बेच  रहा वादों  की मंडी में

शोर बहुत है बस्ती में सुनता नहीं कोई

 

वो वहीँ खड़ा  चल चित्र दिखा रहा

रंगीन चश्मे की दुनियां समझता नहीं कोई 

 

बाहँ थाम कर जिसे उसने आगे बढ़ाया

कन्धों पर चढ़ गया वो  देखता नहीं कोई

 

मशाल लेकर भीड़ में आगे चला था जो

वो अब बदल गया टोकता नहीं कोई

 

चार दीवारें खड़ी कर बन गया मकां

आपस में लड़ते रहे,मोहब्बत जगाता नहीं कोई

  

झंडे किताब के चर्चे  यों  ही होते…

Continue

Added by Shyam Mathpal on March 13, 2015 at 9:07am — 10 Comments

सुप्रभात

कुंठाओं के झरे पात,

आशाओं का हो सुप्रभात

दफ़न हो घात प्रतिघात

खुशिओं के सदा बहें प्रपात

चैन की आए रात

बची रहे इंसानियत की जात

चलती रहे गीत गजलों की बात

हम समझें सबके जज्बात

खुश्बू भरे मौसम से हो मुलाकात

जख्मी रिश्तों के बदले हालात

जहरीली हवाएँ न करे आघात

कलुषित न हो मन आँगन

सुगन्धित हो यह बरसात

भावनाओं को लग पंख

मिलन की मिले सौगात

बौराए पंछी को मिले मीत

बिछुड़न से मिले राहत

मौलिक व…

Continue

Added by Shyam Mathpal on March 11, 2015 at 2:16pm — 14 Comments

खोज

हर जिंदगी मे एक गीत है प्रीति है

पीड़ा है प्यार है

विरह है साथ है

संगीत है साज है

आक्रोश है संतोष है

संतुष्टि है विरोध है

तूफान है स्रोत है

संयम है क्रोध है

पहाड़ है पौंध है

कविता है कहानी है

पर हर जिंदगी सामने कहाँ आ पाती है

कही भाषा नहीं कहीं कलम नहीं है

कहीं हाथ नहीं कही पावँ नहीं हैं

कहीं आँखें नहीं कहीं कान नहीं हैं

कहीं बेबशी  मे  जबान नहीं है.

मौलिक व अप्रकाशित

श्याम…

Continue

Added by Shyam Mathpal on March 9, 2015 at 4:00pm — 6 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service