झोल खाई हुई खुशी
तारों भरी रात, फैल रही चाँदनी
इठलाता पवन, मतवाला पवन
तरू-तरु के पात-पात पर
उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास
मेरा मन क्यूँ उन्मन
क्यूँ इतना उदास…
ContinueAdded by vijay nikore on March 2, 2020 at 4:30am — 4 Comments
अतुकांत कविता : आदमखोर
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नुकीले दाँत
लंबे-लंबे नाखून
उभरी हुई बड़ी-बड़ी आँखें
चार पैर
लंबी-सी जीभ
बेतरतीब बाल
भयानक चेहरा
बेडौल शरीर
डरावनी दहाड़ ?
नहीं-नहीं ...
वो ऐसा बिलकुल नहीं है
उसके पास हैं
मोतियों जैसे दाँत
तराशे हुए नाखून
खूबसूरत आँखें
दो पैर, दो हाथ
सामान्य-सी जीभ
सलोना चेहरा
सजे-सँवरे बाल
आकर्षक शरीर
मीठे बोल
किंतु...
वो…
Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 1, 2020 at 11:18pm — 2 Comments
Added by मनोज अहसास on March 1, 2020 at 10:45pm — 4 Comments
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