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Neeraj Nishchal's Blog – February 2018 Archive (5)

अंजामे दिल/ग़ज़ल

महफिलों से एक दिन जाना ही है ।

आख़िरश अंजामे दिल तनहा ही है ।

क्या हुआ जो आज मै तड़पा बहुत,

मुद्दतों से दिल  मेरा तड़पा ही है ।

मै तुम्हे अपनी हकीकत क्या कहूँ,

तुमने जो सोचा तुम्हे करना ही है ।

प्यार के सपने बिखर कर चूर हैं,

प्यार भी शायद कोई सपना ही है ।

प्यार में दिल टूटना क्यों आम है,

सब ये कहते हैं कि ये…

Continue

Added by Neeraj Nishchal on February 18, 2018 at 1:56am — 3 Comments

इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल

इश्क कुछ इस तरह निबाह करो ।
तुम मुझे और भी तबाह करो ।

तोड़ दो दिल तो कोई बात नहीं,
टूटे दिल मे मगर पनाह करो ।

मै अगर कुछ नहीं तुम्हारा हूँ,
दर्द पर मेरे तुम न आह करो ।

चाहना तुमको मेरी फितरत है,
तुम भले ही न मेरी चाह करो ।

तुम सजा पर सजा सुना दो पर,
मत कहो मुझसे मत गुनाह करो ।

आज कुछ यूँ मुझे सताओ तुम,
ग़ज़ल पर मेरी वाह वाह करो ।

नीरज मिश्रा
मौलिक व अप्रकाशित

Added by Neeraj Nishchal on February 15, 2018 at 5:26am — 4 Comments

दिल/ग़ज़ल

दर्द में ऐसे जलता है दिल ।
मोम जैसे पिघलता है दिल ।

यादों में ही रहे बेकरार,
यादों में ही बहलता है दिल ।

दर बदर ठोकरें मिल रहीं,
पर भला कब सँभलता है दिल ।

कुछ कभी तो कभी है ये कुछ ,
लमहा लमहा बदलता है दिल ।

तनहा तनहा किसी शाम सा,
होके वीरान ढलता है दिल ।

प्यार का कोई दरिया सा है,
जिसमें हर वक्त घुलता है दिल ।

नीरज मिश्रा 

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Neeraj Nishchal on February 14, 2018 at 12:18am — 6 Comments

मजबूर/ग़ज़ल

होके मजबूर तेरी गलियों से जाना होगा ।

अब खुदा जाने कहाँ अपना ठिकाना होगा ।

मै मना पाया न रब को न तेरे दिल को,

अब तो तनहाई में खुद को ही मनाना होगा ।

जान मेरी मै बिना तेरे जियूँगा लेकिन,

मेरे जीने में न जीने का बहाना होगा ।

तनहा होकर भी रहूँगा न कभी तनहा,

तेरी यादों का मेरे साथ ज़माना होगा ।

हर रजा अपनी मै हारूँगा रजा पर तेरी,

प्यार जब कर ही लिया है तो निभाना होगा ।

प्यार का नाम फकत प्यार को…

Continue

Added by Neeraj Nishchal on February 13, 2018 at 9:37am — 10 Comments

बन गया तुम्हारी याद हूँ मैं/ग़ज़ल

कुछ कह न सकूं राहे दिल पर बरबाद हूँ या आबाद हूँ मै ।

रहती है तेरी याद मुझे या खुद ही तेरी याद हूँ मै ।

 

ठुकराया भी तुमसे न गया अपनाया भी तुमसे न गया,

उल्फत के दर फरियादी की इक टूटी सी फरियाद हूँ मै ।

मैं जिस्म हूँ कोई माटी का इस जिस्म की जान तुम्ही तो हो,

कुछ भी न तुम्हारे पहले था कुछ भी न तुम्हारे बाद हूँ मै ।

ये दर्दे जुदाई भी तेरी ये इश्के खुदाई भी तेरी,

तेरे गम में गमगीन फिरूँ तेरे मद…

Continue

Added by Neeraj Nishchal on February 12, 2018 at 12:30am — 2 Comments

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