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Kalipad Prasad Mandal's Blog – January 2018 Archive (6)

लावणी छंद पर आधारित रचना =कालीपद 'प्रसाद'

मुसीबतों से लोकतंत्र को, जल्दी उबारना होगा

निर्धनों के हक़ में देश में कानून बदलना होगा |

निर्धन नहीं खड़ा हो सकता, पार्षद के भी चुनाव में

लाखों रुपये चाहिए उसे, चुनाव दंगल लड़ने में |

गणतंत्र अभी धनतंत्र हुआ, धनाढ्य चुनाव लड़ते हैं

गरीब कैसे लडेगा भला, पास न लाखो रूपये हैं’ |

धनबल बाहुबल की प्रचुरता, ताकत बड़ी अमीरों की

निर्धनता ही कमजोरी है, इस देश के गरीबो की |

भ्रष्टाचार और महँगाई, साथ यौन शोषण भी…

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Added by Kalipad Prasad Mandal on January 28, 2018 at 10:17am — 5 Comments

ग़ज़ल-ये'  माया मोह का  चक्कर है’ कैसे काटे’ बंधन को|

काफिया :अन ; रदीफ़ : को

बहर : १२२२  १२२२  १२२२  १२२२

अलग अलग बात करते सब, नहीं जाने ये' जीवन को

ये'  माया मोह का  चक्कर है’ कैसे काटे’ बंधन को|

किए  आईना’दारी मुग्ध  नारी जाति  को जग में

नयन मुख के  सजावट  बीच भूले  नारी’ कंगन को |

सुधा रस  फूल का पीने दो’ अलि  को पर कली को छोड़

कली को नाश कर अब क्यों उजाड़ो पुष्प गुलशन को|

बदी की है वही जिसके लिए हमने दुआ माँगी

न ईश्वर दोस्त ऐसे दे मुझे या मेरे…

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Added by Kalipad Prasad Mandal on January 23, 2018 at 11:02am — 8 Comments

ग़ज़ल -महात्मा जो हैं, वो करम देखते हैं=कालीपद 'प्रसद'

काफिया : अम   रदीफ़: देखते हैं

बह्र : १२२  १२२  १२२  १२२

महात्मा जो हैं, वो करम देखते हैं

अधम लोग उसका, जनम देखते हैं |

बहुत है दुखी कौम  गम देखते हैं

सुखी कौम गम को तो’ कम देखते हैं |

अतिथि मुल्क में जो भी’ आये यहाँ पर  

मनोहर बियाबाँ, इरम देखते है |

दिशा हीन सब नौजवान और करते क्या

वज़ीरों के’ नक़्शे कदम देखते हैं |

किया देश हित काम जनता ही’ देखे

विपक्षी तो’ केवल सितम देखते हैं…

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Added by Kalipad Prasad Mandal on January 17, 2018 at 11:30am — 2 Comments

ग़ज़ल -हुक्म की तामील करना कोई’ बेदाद नहीं-कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : आद ; रदीफ़ :नहीं

बहर : २१२२  २१२२  २१२२  २२(११२)

हुक्म की तामील करना कोई’ बेदाद नहीं

बादशाही सैनिकों से कोई’ फ़रियाद नहीं |

“देशवासी की तरक्की हो” पुराना नारा

है नई बोतल, सुरा में तो’ ईजाद नहीं |

भक्त था वह, मूर्ति पूजा की लगन से उसने

द्रौण से सीखा सही वह, द्रौण उस्ताद नहीं |

देश है आज़ाद, हैं आज़ाद भारतवासी

किन्तु दकियानूसी’ धार्मिक सोच आज़ाद नहीं |

लूटने का मामला…

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Added by Kalipad Prasad Mandal on January 13, 2018 at 9:41am — 8 Comments

ग़ज़ल -चहरा छुपा रखा है’ सनम ने नकाब में- कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : आब ; रदीफ़ : में

बहर : २२१  २१२१  १२२१  २१२

चहरा छुपा रखा है’ सनम ने नकाब में

मुहँ बंद किन्तु भौंहे’ चड़ी हैं इताब में |

इंसान जो अज़ीम है’ बेदाग़ है यहाँ  

है आग किन्तु दाग नहीं आफताब में |

जाना नहीं है को’ई भी सच और झूठ को

इंसान जी रहे हैं यहाँ’ पर सराब में  |

इंसां में’ कर्म दोष है’, जीवात्मा’ में नहीं

है दाग चाँद में, नहीं’ वो ज्योति ताब में |

मदहोश जिस्म और नशीले…

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Added by Kalipad Prasad Mandal on January 8, 2018 at 10:00am — 8 Comments

ग़ज़ल-सुन्दर खुशबू फूलों से ही मोहक मंजर लगता है-कालीपद 'प्रसाद'

नव वर्ष २०१८ के लिए हार्दिक शुभकामनाओं सहित |

*************************************************

काफिया : अर ;रदीफ़ : लगता है

बहर: २२  २२  २२  २२  २२  २२  २२  २

सुन्दर फूलों की खुशबू मोहक मंजर लगता है |

फागुन आने के पहले ही, होली अवसर लगता है |

मधुमास में’ टेसू चम्पा, और चमेली का है जलवा

श्रृंगार से धरती दुल्हन लगती, गुल जेवर लगता है |

काले बादल बरसे गांवों में, मन का आपा खोकर

जहां भी देखो नीर नीर…

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Added by Kalipad Prasad Mandal on January 2, 2018 at 9:00am — 8 Comments

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