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लघुकथा विधा पर योगराज प्रभाकर जी से बातचीत
27 Replies

मन मस्तिष्क में भाव अनगिनत थे, लफ़्ज़ों का भंडार भी था! फिर भी उन भावों को लफ़्ज़ों से बाँध पाना दुश्वार सा था। पर इस कशमकश से निकालने के लिये शायद "खुदा" ने एक ज़रिया एक इंसान के रूप में मुक़र्रर…Continue

Started this discussion. Last reply by योगराज प्रभाकर Jul 19, 2016.

 

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surat ..gujrat
Native Place
hisar
Profession
writer for script writings n stories

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At 1:45pm on August 29, 2015, मनोज अहसास said…
आपका स्वागत है
हमे उम्मीद है जल्द ही आपकी रचनाये पढ़ने को मिलेगी
सादर
At 2:01pm on August 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया रश्मि जी आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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At 1:43pm on August 28, 2015, rashmi tarika said…

 thx obo ....

 
 
 

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