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Pankaj Mishra
  • 25, Male
  • Kolkata ,WB
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मिथिलेश वामनकर left a comment for Pankaj Mishra
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!"
Jul 15, 2015
NEHA SHARMA and Pankaj Mishra are now friends
Oct 29, 2013
Sushil.Joshi commented on Pankaj Mishra's blog post .....बेखबर .....
"आ0 पंकज भाई.... ओबीओ में आपका स्वागत है..... इस प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें.... बहुत ही खुशी हुई कि अंग्रेज़ी में शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी आप हिंदी सीखने एवं लिखने के प्रति इतने संवेदनशील हैं..... थोड़ी सी और मेहनत आपको एक अलग मुक़ाम तक…"
Oct 24, 2013
Pankaj Mishra commented on Pankaj Mishra's blog post .....बेखबर .....
"आप  सभी  का  बहुत बहुत सुक्रिया ..आप  सब  के  विचार  और  ज्ञान  जान कर  बहुत   खुसी  हुई ...वैसे  ये  मेरी  पहली  रचना  थी  जो  OBO  माध्यम  से  प्रकाशित  हुई ..यह  मैंने  बेखबर  के  मनोभावों  को  अपनी  लाइनों  के  माध्यम  से  प्रस्तुत  किया  है …"
Oct 22, 2013
Pankaj Mishra commented on शकील समर's blog post गजल: प्यार में कैसी ये त्रासदी हो गई/शकील जमशेदपुरी
"बहुत खूब ............भाव जबरदस्त है"
Oct 22, 2013
Pankaj Mishra liked शकील समर's blog post गजल: चांदनी आज तेरे छत पे अकेली होगी/शकील जमशेदपुरी
Oct 20, 2013
Pankaj Mishra liked Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post शातिर (अतुकांत) ---गणेश जी बागी
Oct 20, 2013
Pankaj Mishra liked Saurabh Pandey's profile
Oct 20, 2013
Pankaj Mishra posted a blog post

.....बेखबर .....

अपने दिल से मेरा सिलसिला जोड़ दे ,द्वार आखों का अपनी खुला छोड़ दे...ऐसी पागल हवायों की औकात क्यातू जो चाहे तो तूफाँ का रुख मोड़ दे….राह में रोक लेना तो रुसवाई हैसाथ चल या मेरा रास्ता छोड़ दे.साफ चाहत का जिसमे न चेहरा दिखे।दिल ये कहता है वो आइना तोड़ दे ....दुःख में आँखें न आ जाएँ तेरी कहीं रात भर याद में जागना छोड़ दे…।मौलिक व् अप्रकाशितSee More
Oct 20, 2013
रामनाथ 'शोधार्थी' commented on Pankaj Mishra's blog post ग़ज़ल (१)....बेखबर .....
"मैं..आदरणीय शकील साहब की बात से पूर्ण सहमत हूँ...हालाँकि...आ. सौरभ पाण्डेय जी की बातें भी बहुत उचित हैं....//..सादर "
Oct 20, 2013

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Pankaj Mishra's blog post ग़ज़ल (१)....बेखबर .....
"सही कहा वीनस जी आपने. हम दूसरे रुक्न में ही उलझने लगे थे ..  पता नहीं क्यों दूसरा २१२  मुझे सेट क्यों नहीं हो पा रहा था. और बार-बार मात्रा गिराना इधर-उधर कर रहा था. वैसे मात्रा गिरे अक्षर ठीक ही हैं. बहुत अच्छे"
Oct 19, 2013
वीनस केसरी commented on Pankaj Mishra's blog post ग़ज़ल (१)....बेखबर .....
"मित्रों / अग्रजों से निवेदन है कि इस ग़ज़ल को एक बार बह ए मुतदारिक मुसम्मन सालिम फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन२१२ / २१२ /  २१२ /  २१२ पर तक्तीअ कर के देख लें ...शायद ग़ज़ल संतुष्ट कर सके"
Oct 19, 2013

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Pankaj Mishra's blog post ग़ज़ल (१)....बेखबर .....
"आपकी ग़ज़ल के मिसरों को किस वज़्न से देखूँ... गज़ल का दूसरा रुक्न संयत नहीं हो रहा है, मुझे.  क्योंकि मुझमे इसे समझने में शायद कमी है. यह अवश्य है कि बार-बार मात्राओं को गिराना उचित नहीं होता.  बहरहाल, बहुत-बहुत बधाई.. शुभ-शुभ"
Oct 19, 2013
शकील समर commented on Pankaj Mishra's blog post ग़ज़ल (१)....बेखबर .....
"बह्र का उल्लेख कर दीजिए आदरणीय Pankaj Mishra  जी ताकि इससे हम जैसे नए लोग लाभ उठा सकें। सादर।"
Oct 19, 2013
SANDEEP KUMAR PATEL commented on Pankaj Mishra's blog post ग़ज़ल (१)....बेखबर .....
"क्या बात है बहुत खूब"
Oct 19, 2013
Pankaj Mishra posted a blog post

.....बेखबर .....

अपने दिल से मेरा सिलसिला जोड़ दे ,द्वार आखों का अपनी खुला छोड़ दे...ऐसी पागल हवायों की औकात क्यातू जो चाहे तो तूफाँ का रुख मोड़ दे….राह में रोक लेना तो रुसवाई हैसाथ चल या मेरा रास्ता छोड़ दे.साफ चाहत का जिसमे न चेहरा दिखे।दिल ये कहता है वो आइना तोड़ दे ....दुःख में आँखें न आ जाएँ तेरी कहीं रात भर याद में जागना छोड़ दे…।मौलिक व् अप्रकाशितSee More
Oct 19, 2013

Profile Information

Gender
Male
City State
Kolkata
Native Place
Ballia
Profession
Process Manager at Icore Vision Global
About me
i am very simple man,with high thinking..

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At 2:41am on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Pankaj Mishra's Blog

.....बेखबर .....

अपने दिल से मेरा सिलसिला जोड़ दे ,
द्वार आखों का अपनी खुला छोड़ दे..
.
ऐसी पागल हवायों की औकात क्या
तू जो चाहे तो तूफाँ का रुख मोड़ दे…
.
राह में रोक लेना तो रुसवाई है
साथ चल या मेरा रास्ता छोड़ दे
.
साफ चाहत का जिसमे न चेहरा दिखे।
दिल ये कहता है वो आइना तोड़ दे ...
.
दुःख में आँखें न आ जाएँ तेरी कहीं
रात भर याद में जागना छोड़ दे…।

मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on October 18, 2013 at 9:30pm — 8 Comments

 
 
 

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