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Jitendra sharma
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Samar kabeer commented on Jitendra sharma's blog post लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल
"ठीक है । 'कल-कलान' का अर्थ क्या है ?"
Feb 16
Jitendra sharma commented on Jitendra sharma's blog post लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल
"आदरणीय Samar kabeer जी दोनों कवाफ़ी बदले है एक बार देख लें।"
Feb 16
Jitendra sharma posted a blog post

लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल

दिन-भर जो बात करते रहे आस्मान सेसूरज ढला तो लौट के आये उड़ान सेथा वक़्त का ख़याल या हारे थकान सेनिकले थे घर से सुब्ह जो अपने गुमान सेआसां नहीं बुलन्दी को छूना, ये है फ़लकगुज़री हर एक राह तो मुश्किल चढ़ान सेटूटे हुए सितारों से हो किसको वास्तानिस्बत रही सभी को फ़क़त आस्मान सेखामोशियों से करते हैं हालत मेरी बयांआँखों से बहते अश्क मेरे बेजुबान-सेजब मग़रिबी हवाओं से मुरझा गया चमनकैसे रखें उमीद किसी नौजवान सेबदलेंगे ज़िन्दगी तेरे हालात एक दिनबदली हवा की चाल लगे कल-कलान सेजाने ये किस दयार के इन्सां हैं दोस्तोजो…See More
Feb 16
Jitendra sharma commented on Jitendra sharma's blog post लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब।"
Feb 16
Samar kabeer commented on Jitendra sharma's blog post लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल
"जनाब जितेंद्र शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'जो हौसला लिये थे चले आशियान से' इस मिसरे में क़ाफ़िया दुरुस्त नहीं सहीह  शब्द है, 'आशियाना' देखियेगा  । 'है लग रहा बदलती हवा के रुझान…"
Feb 15
Jitendra sharma posted blog posts
Feb 13
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Feb 13
Jitendra sharma joined Admin's group
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हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"
Jan 16
Jitendra sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय महेंद्र जी, सादर धन्यवाद"
Dec 29, 2018
Jitendra sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय राज नवादवी साहब, बहुत बहुत शुक्रिया।"
Dec 29, 2018
Jitendra sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय मोहन जी बहुत बहुत शुक्रिया साहब"
Dec 29, 2018
Jitendra sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जी बिल्कुल"
Dec 29, 2018
Jitendra sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जनाब समर कबीर साहब आदाब, बहुत बहुत शुक्रिया जनाब । आपकी इस्लाह सर आंखों पर, बिल्कुल सुधार लूंगा और आगे भी पूरा ध्यान रखूंगा।"
Dec 29, 2018
Jitendra sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"मयकदों में शाम गुजरे हाल कैसा बन गयामेरा दिल अब दिल नही उनका खिलौना बन गया हम सुनाने आये उनको हाल ए दिल अपना मगरउन के कानों तक न पहुँचा और फ़साना बन गया यार मेरे पूछते है हाल दिल का जब मुझेमैंने हँस कर कह दिया दिल का तमाशा बन…"
Dec 29, 2018
Jitendra sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी इतनी शानदार प्रतिक्रिया एवं हौसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया"
Nov 24, 2018
Jitendra sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय समर कबीर जी आपकी प्रतिक्रिया एवं सुझाव देने का बहुत शुक्रिया इन्हें अमल में लाने की पूरी कोशिश करूंगा"
Nov 24, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Ahmedabad
Native Place
Jhunjhunu, Rajasthan
Profession
Private job
About me
I am an independent writer of Gazal and poet ,Writing for own soul

Jitendra sharma's Blog

लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल

दिन-भर जो बात करते रहे आस्मान से

सूरज ढला तो लौट के आये उड़ान से

था वक़्त का ख़याल या हारे थकान से

निकले थे घर से सुब्ह जो अपने गुमान से

आसां नहीं बुलन्दी को छूना, ये है फ़लक

गुज़री हर एक राह तो मुश्किल चढ़ान से

टूटे हुए सितारों से हो किसको वास्ता

निस्बत रही सभी को फ़क़त आस्मान से

खामोशियों से करते हैं हालत मेरी बयां

आँखों से बहते अश्क मेरे बेजुबान-से

जब मग़रिबी हवाओं से मुरझा गया…

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Posted on February 13, 2019 at 5:30pm — 4 Comments

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rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"अंतिम लाइन का पहला शब्द मुझको पड़ा जाए, मझको नही , टायपिंग मिस्टेक है। सादर"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब आसिफ़ ज़ैदी साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"अच्छा सुझाव है ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"ऊला में 'उठकर' शब्द भर्ती का है,ऊला यूँ कर लें:- 'आप ने कह तो दिया है,मुझे घर जाना…"
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rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"तूने ठाना आदिल, तुझको उधर जाना था, उनकी चाहत थी, तुझको मर जाना था। ** पाले पत्थरबाज, होली खून की वो…"
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Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"मोहतरम जनाब SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" साहब आदाब बहुत ख़ूबसूरत अशआर, ग़ज़ल के लिए…"
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