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Hemant kumar
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  • Nilesh Shevgaonkar
  • शिज्जु "शकूर"
 

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Mahendra Kumar commented on Hemant kumar's blog post उस से मुझको सच में कोई शिकायत भी नही (ग़ज़ल)
"बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय हेमंत जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर. "
May 15
Samar kabeer commented on Hemant kumar's blog post अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल
"जनाब हेमन्त कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । एक बात आपको बताना चाहता हूँ वो भी इसलिये कि आप अभी सीखने के इच्छुक हैं,वो ये कि ग़ज़ल सिर्फ़ बह्र साधने का नाम नहीं है,इसके लिए अच्छा कथ्य,शिल्प,मिसरों की चुस्त बंदिश…"
May 11
Nilesh Shevgaonkar commented on Hemant kumar's blog post अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल
"आ. हेमंत जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है.... और भी बेहतर हो सकती थी/...रोता बहुत हूँ पर तुने जाना नही,.... इस मिसरे की तक्तीअ कर के देखिये...गाँव आने से आईने   का सम्बन्ध भी नहीं जुड़ रहा है ..सादर "
May 11
Ravi Shukla commented on Hemant kumar's blog post अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल
"आदरणीय हेमंत जी अच्‍छी गजल कही है बधाई"
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Hemant kumar's blog post अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल हुई आदरणीय..सादर"
May 10
Hemant kumar commented on Hemant kumar's blog post अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल
"आदरणीय मिश्रा जी ग़ज़ल की सराहना और आपके प्यार के लिए बहुत बहुत धन्ययवाद! जी अभी अभी ही मैने यह मंच ज्वाइन किया है दो चार ग़ज़ल ही ले दे के पोस्ट हुई है.. सादर।"
May 10
Dr Ashutosh Mishra commented on Hemant kumar's blog post अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल
"आदरणीय हेमंतजी पहली बार आपकी रचना को पढ़ने का सुअवसर मिला रचना अच्छी लगी रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर"
May 10
Hemant kumar commented on Hemant kumar's blog post अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल
"आदरणीय आरिफ सर मेरी ग़ज़ल पर आने और हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया .. सादर..."
May 10
Mohammed Arif commented on Hemant kumar's blog post अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल
"आदरणीय हेमंत कुमार जी आदाब,हर शे'र लाजवाब । बेहतरीन ग़ज़ल के लिए शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
May 10
Hemant kumar posted a blog post

अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल

2212/2212/2212अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,काँटो से मैं खुद को सजाया करता हूँ।इन मन्दिरों में मस्जिदों में जाना क्या,कुछ भूखे बच्चों को खिलाया करता हूँ।रोता बहुत हूँ पर तुने जाना नही,गम को मियाँ हँस कर छुपाया करता हूँ।मुझसे भी मिलने गाँव तुम आया करो,मै सब को आईना दिखाया करता हूँ।मै प्यार मे जीता करूं ! चाहत नही,मै प्यार मे सब हार जाया करता हूँ।मौलिक/अप्रकाशितSee More
May 10
Hemant kumar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post हिन्दी ग़ज़ल...जब सूर्य चले अस्तांचल को
"आदरणीय बृजेश जी उम्दा ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें सादर"
May 10
Hemant kumar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -बस किसी अवतार के आने का रस्ता देखना
"आदरणीय शेवगाँवकर सर इस उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाईंयाँ स्वीकार करें.. बस किसी अवतार के आने का रस्ता देखना बस्तियाँ जलती रहेंगी, तुम तमाशा देखना. इस मत्ला के लिए खास तौर पर बधाई स्वीकारें ! वाह्-वाह् क्या कहने...शेर भी कमाल के हुए है।"
May 5
Hemant kumar commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल: उसको ये समझाना है
"आदरणीय आरिफ सर इस लाजवाब ग़ज़ल के लिए बधाईयाँ कुबूल करें। सादर..."
May 3
Hemant kumar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-रोज़ जो मुझ को नया चाहती है
"आदरणीय शेवगाँवकर सर बहुत बहुत बधाई इस लाजवाब ग़ज़ल के लिए.... सादर...."
May 2
Hemant kumar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post हो गया वह बे मुरव्वत देखते ही देखते
"वाह् वाह् आदरणीय तस्दीक़ सर क्या लाजवाब ग़ज़ल हुई है.... बधाईयाँ..."
May 2
Hemant kumar commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post दिल ए नाकाम पर हँसी आई
"आदरणीय सर इस उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाईयाँ वाह् वाह् हर शेर कमाल के हुए हैं..... सादर.."
May 2

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhatapara. Cg
Native Place
Raipur
Profession
Teacher at education

Hemant kumar's Blog

अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल

2212/2212/2212



अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,



काँटो से मैं खुद को सजाया करता हूँ।







इन मन्दिरों में मस्जिदों में जाना क्या,



कुछ भूखे बच्चों को खिलाया करता हूँ।







रोता बहुत हूँ पर तुने जाना नही,



गम को मियाँ हँस कर छुपाया करता हूँ।







मुझसे भी मिलने गाँव तुम आया करो,



मै सब को आईना दिखाया करता हूँ।







मै प्यार मे जीता करूं ! चाहत नही,



मै प्यार मे… Continue

Posted on May 10, 2017 at 11:47am — 8 Comments

उस से मुझको सच में कोई शिकायत भी नही (ग़ज़ल)

2122, 212, 2122, 212



उससे मुझको सच मे कोई शिकायत भी नही,

हाँ मगर दिल से मिलूँ अब ये चाहत भी नही।



इस बुरुत पर ताव देने का मतलब क्या हुआ,

गर बचाई जा सके खुद की इज्जत भी नही।



अब अँधेरा है तो इसका गिला भी क्या करें,

ठीक तो अब रौशनी की तबीअत भी नही।



आती हैं आकर चली जाती हैं यूँ ही मगर,

इन घटाओं मे कोई अब इक़ामत भी नही।



जुल्म सहने का हुआ ये भी इक अन्जाम है,

अब नजर आँखों में आती बगावत भी नही।



मौलिक व…

Continue

Posted on April 20, 2017 at 11:00am — 14 Comments

ग़ज़ल

२१२२/१२१२/२२

हमने अपने ही पाँव काटे हैं,
इस सड़क पर के छाँव काटे हैं।

जो परींदा मजे से रहता था,
उनके तो सारे ठाँव काटे हैं।

दौड़ना चाहती है हर बेवा,
पर ये दुनिया ने पाँव काटे हैं।

वार जिसने भी करना चाहा तो,
उसके तो सारे दाँव काटे हैं।

जानकर जा रहे शहर(१२) तुम भी,
इस शहर(१२)ने ही गाँव काटे हैं।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on April 6, 2017 at 9:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल

२२१२/२२१२/२२१२

बाजा़र मे दिल आज़माया कर कभी,
दिल बेचने भी यार आया कर कभी।

दिल टूटने का दर्द अब होगा नही,
इन पत्थरों से दिल लगाया कर कभी।

माना सितारों से बहुत हैं प्यार पर,
जुगनूओं को घर भी बुलाया कर कभी।

दुनिया अमीरों के मुआफ़िक हैं मगर,
कुछ घर ग़रीबी के सज़ाया कर कभी।

बे-शक ये रास्ते हैं तरक़्की़ के मगर,
पैमाना पर इनका बनाया कर कभी।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on March 28, 2017 at 9:00pm — 8 Comments

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At 4:38pm on February 8, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

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