For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Hemant kumar's Blog (5)

अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,--ग़ज़ल

2212/2212/2212



अक्सर मैं फूलों को बचाया करता हूँ,



काँटो से मैं खुद को सजाया करता हूँ।







इन मन्दिरों में मस्जिदों में जाना क्या,



कुछ भूखे बच्चों को खिलाया करता हूँ।







रोता बहुत हूँ पर तुने जाना नही,



गम को मियाँ हँस कर छुपाया करता हूँ।







मुझसे भी मिलने गाँव तुम आया करो,



मै सब को आईना दिखाया करता हूँ।







मै प्यार मे जीता करूं ! चाहत नही,



मै प्यार मे… Continue

Added by Hemant kumar on May 10, 2017 at 11:47am — 8 Comments

उस से मुझको सच में कोई शिकायत भी नही (ग़ज़ल)

2122, 212, 2122, 212



उससे मुझको सच मे कोई शिकायत भी नही,

हाँ मगर दिल से मिलूँ अब ये चाहत भी नही।



इस बुरुत पर ताव देने का मतलब क्या हुआ,

गर बचाई जा सके खुद की इज्जत भी नही।



अब अँधेरा है तो इसका गिला भी क्या करें,

ठीक तो अब रौशनी की तबीअत भी नही।



आती हैं आकर चली जाती हैं यूँ ही मगर,

इन घटाओं मे कोई अब इक़ामत भी नही।



जुल्म सहने का हुआ ये भी इक अन्जाम है,

अब नजर आँखों में आती बगावत भी नही।



मौलिक व…

Continue

Added by Hemant kumar on April 20, 2017 at 11:00am — 16 Comments

ग़ज़ल

२१२२/१२१२/२२

हमने अपने ही पाँव काटे हैं,
इस सड़क पर के छाँव काटे हैं।

जो परींदा मजे से रहता था,
उनके तो सारे ठाँव काटे हैं।

दौड़ना चाहती है हर बेवा,
पर ये दुनिया ने पाँव काटे हैं।

वार जिसने भी करना चाहा तो,
उसके तो सारे दाँव काटे हैं।

जानकर जा रहे शहर(१२) तुम भी,
इस शहर(१२)ने ही गाँव काटे हैं।

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Hemant kumar on April 6, 2017 at 9:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल

२२१२/२२१२/२२१२

बाजा़र मे दिल आज़माया कर कभी,
दिल बेचने भी यार आया कर कभी।

दिल टूटने का दर्द अब होगा नही,
इन पत्थरों से दिल लगाया कर कभी।

माना सितारों से बहुत हैं प्यार पर,
जुगनूओं को घर भी बुलाया कर कभी।

दुनिया अमीरों के मुआफ़िक हैं मगर,
कुछ घर ग़रीबी के सज़ाया कर कभी।

बे-शक ये रास्ते हैं तरक़्की़ के मगर,
पैमाना पर इनका बनाया कर कभी।

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Hemant kumar on March 28, 2017 at 9:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल

बहरे मुतदारिक मुसम्मन अहज़ज़ु आखिर
२१२/२१२/२१२/२

रहनुमाई की बरसात है क्या।
फिर चुनाओं के हालात हैं क्या।

झुठ भी बोलो अगर तो सही है,
ये सियासत के शहरात है क्या।

शह्र मे आग है फिर पुरानी ,
दंगो से फिर ये हालात है क्या।

चीखें फिर से सुनाई दे कोई,
बहनों के लूटे अस्मात है क्या।

लोग कितने मजे से यहाँ हैं,
शह्र के ये हवालात हैं क्या।

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Hemant kumar on February 26, 2017 at 8:00pm — 6 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
18 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
19 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
19 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
19 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
19 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
19 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
19 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
23 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service