For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Hareram Sameep
Share
  • Feature Blog Posts
  • Discussions
  • Events
  • Groups
  • Photos
  • Photo Albums
  • Videos
 

Hareram Sameep's Page

Latest Activity

Hareram Sameep commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - फिल बदीह -- खार सीने से लगाता कौन है ( गिरिराज भंडारी )
"Bahut achchhi ghazal...badhai"
Jun 27, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर left a comment for Hareram Sameep
"स्वागत अभिनन्दन  ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए  ग़ज़ल की कक्षा   ग़ज़ल की बातें    भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है | | | | | | | | आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ…"
Jun 24, 2015
Hareram Sameep is now a member of Open Books Online
Jun 19, 2015

Profile Information

Gender
Male
City State
Faridabad Haryana
Native Place
Faridabad
Profession
retired
About me
Author

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:11pm on June 24, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सव, छंदोत्सव, तरही मुशायरा व लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Tasdiq Ahmed Khan commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बोलती निगाहें (लघुकथा)
"जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आ दाब , समाज को आइना दिखाती उम्दा लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"मुहतरमा राजेश कुमारी साहिबा , उम्दा ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |  sher4 और 8 तकाबुले…"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post किसकी ख़ुशी, किसके ग़म (लघुकथा)
"जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आ दाब   , आज कल के हालात पर सुंदर लघुकथा हुई है मुबारकबाद…"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों वक़्त के रहबर का तमाशा देखो)
"जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आ दाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |"
2 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post याद आऊं तो निशानी देखना
"सुन्दर रचना"
3 hours ago
narendrasinh chauhan commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"लाजवाब"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted blog posts
4 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
4 hours ago
राज लाली बटाला commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"मुझे थी जुस्तज़ू जिसकी हुआ अफ़सोस जब देखामेरे इस शह्र में भी अब कोई मुझसा नहीं…"
4 hours ago
राज लाली बटाला updated their profile
4 hours ago
dharmraj jaiswal is now a member of Open Books Online
5 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"आद० जनाब उस्मानी जी आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लखना सार्थक हुआ दिल से बेहद शुक्रगुजार हूँ "
6 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service