For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Gurudeep Tripathi
Share on Facebook MySpace
  • Feature Blog Posts
  • Discussions
  • Events
  • Groups
  • Photos
  • Photo Albums
  • Videos
 

Gurudeep Tripathi's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad] UP
Native Place
Allahabad
Profession
Jornalism
About me
I am not good but i am not bad.

जाने वो कौन सा देश, जहां तुम चले गए...

रात के करीब 11 बज रहे थे। उस वक्त मैं इलाहाबाद में हिन्दुस्तान अखबार में खबरों के मकड़जाल में उलझा था। अब जो साथी पत्रकारिता जगत से जुड़े हैं, खासतौर से डेस्क पर। वह तो जानते हैं रात का समय कितना व्यस्ततम माना जाता है। इसी बीच अचानक एक फोन ने सबको कुछ पल के लिए स्तब्ध कर दिया। सूचना मिली की साथी उर्फी रिजवान सड़क हादसे में गं•ाीर रूप से जख्ती हो गए हैं। जल्दी-जल्दी काम निपटाने के बाद स•ाी लोग अस्पताल की ओर •ाागे। वाकई उर्फी की हालत नाजुक थी। सांसे चल रहीं थीं बस। वह हंसमुख चेहरा वेंटिलेटर पर एक जिंदा लाश की तरह पड़ा था। अपने पत्रकारिता के कॅरिअर में हमें इस दूसरे घटना से बहुत पीड़ा हुई थी। इसके पहले प्रतापगढ़ जिले के ब्यूरो चीफ अमरेश मिश्रा जी की सड़क हादसे ने मौत ने आहत किया था। इसके बाद उर्फी के साथ हुए हादसे ने। लगातार उक हफ्ते तक जंग लड़ा उर्फी ने पर, उस जंग में हम सबको सिर्फ मायूसी हाथ लगी। उर्फी तुम सुन रहे हो न... चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश... जहां तुम चले गए...

‘उर्फी रिजवान...कैसे हो मेरी जान...’
आॅफिस के गेट से जैसे ही इंट्री होती तो सबसे पहले रिशेप्शन पर दुबले-पतले और सुंदर नौजवान उर्फी रिजवान से ही मुलाकात होती थी। चेहरे पर हमेशा मुस्कान। सच बताऊं तो लिखते समय उर्फी का हंसता हुआ चेहरा ही नजर आ रहा है। हाथ मिलाने के बाद तेज आवाज में एक ही बात जुबां से निकलती थी। उर्फी रिजवान...कैसे हो मेरी जान...। इतना सुनते ही सब आॅफिस में केवल ठहाके लगाते थे। उर्फी •ाी मुस्कुराने के अलावा कोई जवाग नहीं दोता था। उसकी मुस्कान ने मेरा ही नहीं पूरे आॅफिस की दिल जीत लिया था। उर्फी वाकई तुम बहुत याद आते हो। •ागवान से कामना करता हूं दोस्त तुम्हारी आत्मा को शांति मिले। पर, यूं अकेला छोड़कर जाना दोस्ती नहीं कहलाती है।

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:10am on January 25, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
3 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service