For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आध्यात्मिक चिंतन Discussions (77)

← Back to आध्यात्मिक चिंतन
Discussions Replies Latest Activity

Raz Nawadwi: In the Labyrinth of My Mystical Alleys-3

What can be a better weapon to kill your adversaries than with your kindness? The ones so killed would always live in the awe of your unsun…

Started by राज़ नवादवी

0 Aug 6, 2013

Raz Nawadwi: In the Labyrinth of My Mystical Alleys-1 (Destiny is no third party)

Destiny is no third party! It is the steam of our own unconsumed and unworked out past in the form of subtle and intense thought waves of u…

Started by राज़ नवादवी

0 Aug 6, 2013

Raz Nawadwi: In the Labyrinth of My Mystical Alleys-2 (मेरी रहस्यवादी वीथी के व्यामोह में-२)

मुझे द्वंद्वों, द्वैतों, समासों, अपवर्त्यों, अथवा विभक्तियों में जीने की कोई आवश्यकता नहीं, जिन्हें जाने अनजाने मैंने स्वयं ही अपने ऊपर लाद…

Started by राज़ नवादवी

0 Aug 6, 2013

राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-५२

कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स पे ढेर सारे धार्मिक और मजहबी पोस्ट आते रहते हैं और हैरत की बात है कि हर इंसान अपने ही धर्म को अच्छा कहता है. ....…

Started by राज़ नवादवी

0 Jul 28, 2013

Divine Love

Divine Love is a circle with its centre inside and circumference outside us!   दिव्य प्यार एक ऐसा वृत्त है जिसकी धुरी हमारे अन्दर और परिसीम…

Started by राज़ नवादवी

0 Jul 19, 2013

GOD "IS"

                                                 God "IS"   Ever wonder how every thing around us, in the big scheme, is in balance!   It…

Started by vijay nikore

0 Jun 22, 2013

धर्म की प्रासंगिकता

वर्तमान समय में धर्म के नाम पर लोगों में असहिष्णुता बढ़ती जा रही है। सभी अपने अपने धर्म को लेकर बहुत ही संवेदनशील हैं। अतः अक्सर धर्म के ना…

Started by ASHISH KUMAAR TRIVEDI

4 Apr 30, 2013
Reply by केवल प्रसाद 'सत्यम'

आखिर क्यों

एक समय था जब अक्सर मेरे ह्रदय में यह प्रश्न उठता था। हे प्रभु 'आखिर क्यों' तुमने मुझे यह जीवन दिया जिसमे इतनी तकलीफें हैं, इतना संघर्ष है,…

Started by ASHISH KUMAAR TRIVEDI

12 Apr 26, 2013
Reply by ASHISH KUMAAR TRIVEDI

हनुमान जयन्ती

हनुमान जयन्ती पर सभी भाविकों और राष्ट्र भक्तों को बधाई और शुभकामनाएं. अनुशासित और मर्यादित आचरण के अप्रतिम प्रतीक हैं श्री हनुमानजी महाराज,…

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा

2 Apr 26, 2013
Reply by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा

’’मन और मन की अवधारणा’’

गतांक से आगे......भाग.2......मनुष्य को यदि चैतीस अक्षरों का ज्ञान है तो उसे यह समझना चाहिए कि उसे सारे वेदों और शास्त्रों आदि का ज्ञान हो च…

Started by केवल प्रसाद 'सत्यम'

0 Apr 25, 2013

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
yesterday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service