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आध्यात्मिक चिंतन Discussions (77)

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नाम पर झगड़ा

नाम पर झगड़ा ========== यह समस्त ब्रह्माॅंड एक ही परम सत्ता की कल्पना का विस्तार है लेकिन अनेक लोग उसे अलग अलग नाम देकर अपने पसंद के नाम को…

Started by Dr T R Sukul

0 Jun 27, 2016

भगवान

भगवान ====== आजकल हमारे समाज में बिना किसी मापदंड के किसी को भी भगवान कहा जाने लगता है! भारतवर्ष में अनेक लोग अपने को भगवान कहलाना पसंद करत…

Started by Dr T R Sukul

0 Jun 14, 2016

धर्म परिवर्तन

धर्म परिवर्तन --------------- तथाकथित धर्म के रक्षक, समय समय पर अपने राजनैतिक लाभ के लिये समाज के निम्न आय और कमजोर समूह के लोगों को धर्म प…

Started by Dr T R Sukul

0 Jun 3, 2016

राक्षसी विद्या

राक्षसी विद्या---------------- प्राचीन भारत में वैद्यक शास्त्र उन्नत अवस्था में था, इसमें मृत देह को लेकर परीक्षण करने की छात्रोपयोगी प्राय…

Started by Dr T R Sukul

0 May 27, 2016

मानव धर्म / भागवत धर्म

मानव धर्म / भागवत धर्म================देखा जाय तो ब्रह्म चक्र के क्रमशः संचर और प्रतिसंचर मार्ग में चलते हुए मनुष्य की स्थिति तक पहुंचते हु…

Started by Dr T R Sukul

0 May 16, 2016

आध्यात्म के नाम पर शोषण

आध्यात्म के नाम पर शोषण ==================भूतकाल में राजा और महाराजा लोग ‘ यज्ञ ‘ करके यह दर्शाया करते थे कि वे कितने बहादुर हैं परंतु यह भ…

Started by Dr T R Sukul

7 May 12, 2016
Reply by Saurabh Pandey

बाबा की क्लास ( श्री, श्रद्धा, ज्ञानी)

बाबा की क्लास ( श्री, श्रद्धा, ज्ञानी) ---------------------------------------चन्दु - बाबा! हम लोग किसी के नाम से पहले ‘श्री‘ क्यों लिखते य…

Started by Dr T R Sukul

1 May 12, 2016
Reply by Saurabh Pandey

परमपुरुष की विशेषता

परमपुरुष की विशेषता =============== परमात्मा को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह ब्रह्माॅंड उन्होंने ही बनाया है , परमा प्रकृति को…

Started by Dr T R Sukul

1 May 12, 2016
Reply by Saurabh Pandey

शास्त्र(scripture)

शास्त्र(scripture) यह सार्वभौमिक रूप से सभी युगों में , सभी स्तरों पर स्वीकार किया जाता रहा है कि धर्म ही मनुष्य जीवन की मुख्य धारा है। जी…

Started by Dr T R Sukul

3 May 12, 2016
Reply by Saurabh Pandey

देवता, उपदेवता और अपदेवता

देवता, उपदेवता और अपदेवता ------------------------------------ अविद्यामाया के कुहरे में अज्ञानी और अंधविश्वासी लोग परमपुरुष को नहीं देख सकत…

Started by Dr T R Sukul

1 May 12, 2016
Reply by Saurabh Pandey

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"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
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प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
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"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
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Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
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Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
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Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
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चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
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