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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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अखिया के रस्ते मन में समां के काहे भरमावे लू ,

अखिया के रस्ते मन में समां के काहे भरमावे लू , हो जानिया , हो रानिया ओ माहिया, इयाद तोहर आवे ला तू काहे ना आवे लू , अखिया के रस्ते मन में स…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Aug 30, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

लागत बा इ फैसन वाली , ले ली हमरो जान ,

ले गइल हमरो रात के निंदिया , दिन में रही ले परेशान , लागत बा इ फैसन वाली , ले ली हमरो जान , बाबु जी त मना कईले , भईया हमके खूब समझइले , हमर…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Aug 30, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

अषाढ़ सावन के अंजोरिया

हम २८ तारीख के बाहर सुतल रहनी, कुछ देर के बाद खूब चटकार अंजोरिया निकलल, पाहिले त मन बड़ा खुश भईल लेकिन उ ख़ुशी थोड़े देर में गायब हो गईल. ह…

Started by आशीष यादव

2 Aug 28, 2010
Reply by आशीष यादव

मय मय में चल गइल ,

मय मय में चल गइल , जब बुधी भइल , मय हाथ से निकाल गइल , मय मय में चल गइल , बाबूजी समझवाले , भईया खुबे मनवाले , बाकिर मय खातिर , इ मन बहक गइल…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Aug 27, 2010
Reply by आशीष यादव

एगो सितारा नाम भिखारी, रहले भोजपुरिया ,

एगो सितारा नाम भिखारी, रहले भोजपुरिया , भोजपुरी साहित्य के उठवले जाने सारा दुनिया , १८ दिसम्बर १८८७ कुतुबपुर में लेले जनमिया , रहले इ हजाम…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Aug 27, 2010
Reply by आशीष यादव

राखी आइल चल गईल ,

राखी आइल चल गईल , कही मस्ती छा गईल , चलल खूब मिठाई , बहिन भाईयन के , कलाई पर बांधली !! कहीं इ ख़ुशी दे गईल , आउर कही गम के गुबार, देकर चल…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Aug 27, 2010
Reply by आशीष यादव

neta ho gail bate

Started by Rash Bihari Ravi

3 Aug 18, 2010
Reply by आशीष यादव

सावन महिना मनभावन बलम हो लुभावन बा ,

सावन महिना मनभावन बलम हो लुभावन बा , हरिहर चुरी हरिहर साडी बलम इहो सावन बा , नहीं बोलब हम साडी ला द बलम बड कारन बा , चुरी का पहिनी हमू बलम…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Aug 17, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

हम चाही ले करे के प्यार

हम चाही ले करे के प्यार गोरी हमरो जगहिया बता द , बता द हमारो जगहिया बता द , कहा से करी सुरु कहवा ख़तम एतना त हमके बता द , बता द हमारो जगहिय…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Aug 17, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

अंचरवा ओढ़ा देहीं

आजा- आजा राजा करेजा से लगा लेहीं. आव पंजरवा अंचरवा ओढ़ा देहीं. आजा-आजा --------------------------------- चोरवा बनल आज सगरी नगरिया. कईसे बचा…

Started by satish mapatpuri

1 Aug 17, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

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"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
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