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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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सोची ले ,

सोची ले , इ सभ बात के जीवन में उतार ली , जवना के वजह से , राम पुरुषोतम भाईले , हरिश्चंद उत्तम भाईले , परसुराम के जवान ताकत बनल , धर्मराज जव…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Dec 31, 2010
Reply by Santosh Kumar

रे बदरा तू मत आ रे ,

रे बदरा तू मत आ रे , अइहे मोरे सजनवा रे , हो जाई मन में हलचल , जब संगे चलिहे सजना रे , बड़ी मुस्किल से उ कहले , आज मिलन के बेला बा , तू जे…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Dec 31, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

हम के बानी ?,

हम के बानी ?, इहे सोच के , बिचार के , परेशान बानी , अब कुछुओ नइखे सूझत , हम बेकार बानी , हम के बानी ?, मन कहलस हम पंडित , हमरा बात में दम…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Dec 27, 2010
Reply by Neet Giri

गम से हमार नाता बाटे पुरान ,

गम से हमार नाता बाटे पुरान , इंसानियत कहाला का ना पवनी जान , हमरा त बाटे बस एतना बतावे के , जान जाई इ किस्सा बा बड़ा दुःख दाइ , आइल अइसन आं…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Dec 23, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

उ आँगन होला गंगा अस पावन ,

उ आँगन होला गंगा अस पावन , रहे जहा तुलसी के वास , तोहरे पे लागल बाटे आस , मत तुरिहा विश्वास ऐ माई, मत तुरिहा विश्वास, हमार घर बाटे एगो मंदि…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Dec 23, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

मुख्य प्रबंधक

कुहकत बाड़ी "माई भोजपुरी"

कुहकत बाड़ी "माई भोजपुरी", बीच बाज़ार मे, मत बाटs हमरा के यू.पी. अऊर बिहार मे, ममता तड़प उठsल मतलबी समाज मे, मत बाटs हमरा के यू.पी. अऊर बिह…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

26 Dec 19, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

दुनिया के कईसे लुटल जाई ,

No Description

Started by Rash Bihari Ravi

3 Dec 15, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

भैया पुलिश वाला हमार बात लिह मानs ,

भैया पुलिश वाला हमार बात लिह मानs , तू छोड़ा गुंडा गर्दी अब एतना लिह जानs , अब नइखे भलाई जे कोई तोहरा हाथ से माराइ , अब तोहे मिल सके ला सजा…

Started by Rash Bihari Ravi

6 Dec 14, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

तहार रूप गोरी मनमोहक ,

तहार रूप गोरी मनमोहक , हमरा मन के बहकाये , हम दूर त ना रहे चाही , इ लगे लेके आवे , तहरो बतिया अच्छा लागे , जवन मन के चहकाये , तहार रूप गोरी…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Dec 13, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

माइ के भेट चढावे द ,

हमके सपने में जिए द , हकीकत में कुछ न कर पाई ले , झूठ मूठ के झुझलाई ले , लड़ के मरे के चाहत मन में बा , बाकिर डर के भाग जाई ले , जवान न कर प…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Nov 20, 2010

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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
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