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होली 

------
एक डाल पर कोयल बैठी 
दूजी डाल पर कउआ 
होली में रंग न जाएँ 
सता रहा था हउआ 
------------------------
कउआ बोला कोयल से 
तितली तोता रंग बिरंगे 
खूब फबेगा हर रंग इन पे 
मिल जब सब रंग खेलेंगे 
हम तुम देखो काले काले 
हम पे रंग कोई न डालेगा 
हर बरस की तरह इस बरस 
दुःख मन ही मन सालेगा 
बैठा भालू मगन मस्त 
बाल काट रहा है नउआ
होली में रंग न जाएँ 
सता रहा था हउआ 
------------------------
भांति  भांति पकवान बने 
उपवन बाग़ तड़ाग सजे 
मोर मगन मन  नाच रहा 
सियार भरे चटकारे 
लोमड़ी घात लगाये बैठी 
कब हो वारे न्यारे 
 मछली जल में तैर  रही 
हाथी रह रह चिघाडे 
हिरनी की चाल देख 
चीत भरे दहाड़े 
खिडकी बाहर झाँक रहा 
नन्हा प्यारा  बउआ 
होली में रंग न जाएँ 
सता रहा था हउआ 
--------------------------
फुदक  फुदक मेंढक भागे 
सुर आज था उसका  धीमा 
आया शेर देख सब दौड़े 
करवाने अपना  बीमा 
टप  टप  घोडा  आया 
सुन गर्दभ की तान 
पी पी  पपीहा  बोले 
होंठों पे मेघों के छायी 
मधुर मधुर मुस्कान 
कुत्ता  भौं  भौं  बैण्ड  बजाये 
ढोल  बजावे  कउआ 
होली में रंग न जाएँ 
सता रहा था हउआ 
----------------------------
प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा 
19-3-2013

Views: 683

Replies to This Discussion

बच्चों के लिए बहुत सुन्दर होली गीत लिखा है आपने आदरणीय प्रदीप जी,

पहला बंद बहुत सुन्दर बन पड़ा है जिसमें कोयल और कौवे की बातें दिखाई हैं...

आपको बहुत बहुत बधाई..

एक बात देखी गयी है, बाल रचनाएँ बच्चे याद कर सकें और उन्हें पूरा आनंद लेकर गायें, यदि यह हेतु हो तो रचनाकार बच्चों के लिए छोटी छोटी रचनाएँ लिखना ज्यादा पसंद करते हैं... जिसमें कथ्य भी सार्थक हो और बच्चों के लिए रोचकता भी बनी रहे.

सादर.

आदरणीया प्राची जी 

सादर 

आपने अपने व्यस्त समय से इसे अनुमोदन प्रदान किया . आभारी  हूँ. 

आपकी बात याद है. 

पोता कहता गया बाबा और तो ज्यादा लिख गया . 

धन्यवाद. 

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