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शिज्जु "शकूर"'s Discussions (2,379)

Discussions Replied To (2183) Replies Latest Activity

"अच्छा प्रयास है आदरणीय मोहन बेगोवाल सर"

शिज्जु "शकूर" replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"अच्छी ग़ज़ल है कृष्ण मिश्रा जी चौथे शे'र के ऊला में देखिये इस बह्र का आखिरी रुक्न १२२२…"

शिज्जु "शकूर" replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"ज़लज़ला जिस बयाँ से उठता है वो किसी दास्ताँ से उठता है ख़्वाब तो ख़ाक हो गये थे फिर…"

शिज्जु "शकूर" replied Jan 22, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"आदरणीय राणा साहब नाउम्मीद को न उम्मीद लिखना और 1221 के वज्न में बाँधना और मेहरबान को…"

शिज्जु "शकूर" replied Jan 21, 2016 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 65 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

5 Jan 24, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"इस बार तरही मुशायरे में ख़ूब ट्विस्ट है। मूल ग़ज़ल 2122 1212 22 इस अर्कान में है आपने म…"

शिज्जु "शकूर" replied Jan 7, 2016 to "OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ

214 Jan 23, 2021
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"विनम्र श्रद्धांजलि"

शिज्जु "शकूर" replied Jan 6, 2016 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय रवि शुक्ला जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया"

शिज्जु "शकूर" replied Dec 26, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-66

700 Dec 27, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आप जैसे ग़ज़लकार की सराहना से हौसला बढ़ता है आपका बहुत बहुत शुक्रिया"

शिज्जु "शकूर" replied Dec 26, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-66

700 Dec 27, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बहुत बहुत शुक्रिया सुनील जी"

शिज्जु "शकूर" replied Dec 26, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-66

700 Dec 27, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आपका बहुत बहुत शुक्रिया"

शिज्जु "शकूर" replied Dec 26, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-66

700 Dec 27, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

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"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

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