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Sushil Sarna's Discussions (1,416)

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"बोझ जितना भी माँ से उठता हैउतना कब इस जहाँ से उठता है आ गई फिर से रोशनी दिल मेंदेख प…"

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"दूर जाओ कहीं भी ये सच है,हर जनाजा मकाँ से उठता है| वाह क्या बात है आदरणीय .... सुंदर…"

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"कौन है जो यहाँ से उठता है ?आदमी है जहाँ से उठता है जानकर बार बार जो गिरता वह सदा आसम…"

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आँखों से यां जुबाँ से उठता है दर्द बता कहाँ से उठता है वो जैसी जिन्दगी निभायेगा साथ…"

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"पर्दा ही पर्दा है उठाये चश्मदेखना है कहाँ से उठता है वाह शानदार ग़ज़ल के लिए हार्दिक ब…"

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan  जी आपने मेरे प्रयास को सराहा , आपके तहे दिल से शुक्रिया। "

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय मोहन बेगोवाल  जी आपने मेरे प्रयास को सराहा , आपके तहे दिल से शुक्रिया। "

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय समर कबीर जी आपने मेरे प्रयास को सराहा , आपके तहे दिल से शुक्रिया। "

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी ग़ज़ल के प्रयास को आपकी थपकी ने सृजन का जो हौसला दिया है उसके…"

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"ब कोई कारवाँ से उठता हैसाथ कौन इस जहाँ से उठता है बेबसी बढ़ के तोड़ दी हद क्या ?नाला क…"

Sushil Sarna replied Jan 23, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-67

742 Jan 23, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

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"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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