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dilbag virk's Discussions (601)

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प्रधान संपादक

"अति सुंदर"

dilbag virk replied Nov 8, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३ ( Now Closed with 1048 Replies )

1048 Nov 11, 2011
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"मौसम पर एक तुकबंदी मेरी ओर से भी   मौसम के तेवर कडे़, गर्मी हो या ठंड़ कुदरत से खिलव…"

dilbag virk replied Nov 8, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३ ( Now Closed with 1048 Replies )

1048 Nov 11, 2011
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है कृपया पधारें चर्चा मंच-687:चर्चाकार-…"

dilbag virk replied Nov 3, 2011 to "ओबीओ लाईव तरही मुशायरा" अंक १६ में सम्मिलित सभी रचनाएँ

17 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"ग़ज़लों का सुंदर संकलन एक से बढकर एक ग़ज़ल पढने को मिली इस आयोजन के लिए OBO टीम बधाई…"

dilbag virk replied Oct 31, 2011 to "ओबीओ लाईव तरही मुशायरा" अंक १६ में सम्मिलित सभी रचनाएँ

17 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"सुझाव और तारीफ के लिए सभी का शुक्रिया अदा करता हूँ उम्मीद है इस मंच से काफी कुछ सीखन…"

dilbag virk replied Oct 27, 2011 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - १६ (Now closed with 740 Replies )

740 Oct 30, 2011
Reply by योगराज प्रभाकर

"खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई कबूल करें"

dilbag virk replied Oct 27, 2011 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - १६ (Now closed with 740 Replies )

740 Oct 30, 2011
Reply by योगराज प्रभाकर

"ग़ज़ल कहने की योग्यता मुझमें नहीं, फिर भी एक तुकबंदी पेश करने की गुस्ताखी सिर्फ इसलि…"

dilbag virk replied Oct 27, 2011 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - १६ (Now closed with 740 Replies )

740 Oct 30, 2011
Reply by योगराज प्रभाकर

"mhautsv ank 9 hetu rachnaaen khan posr kren"

dilbag virk replied Jul 8, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ

214 Jan 23, 2021
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
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