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मिथिलेश वामनकर's Discussions (7,390)

Discussions Replied To (5727) Replies Latest Activity

"आदरणीय ओमप्रकाश जी, राजनितिक परिप्रेक्ष्य में न्याय सिद्धांतों को परिभाषित करती  बढ़ि…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीया डॉ नीरज जी, बेईमानी के काम में ईमानदारी और अनैतिक काम में नैतिकता .... भ्रष्…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय विजय शंकर सर, राजनीती में सही गलत को मापदंड ही अलग है. प्रदत्त विषय को सार्थक…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीया कांता जी, बदनामी कभी पीछा नहीं छोडती और वही आपकी पहचान बन जाती है.  प्रदत्त…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीया रीता जी दहेजलोभी छद्म आदर्शवादियों पर तीखा प्रहार करती बढ़िया लघुकथा हुई है. …"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीया सीमा जी प्रदत्त विषय को सार्थक करती बहुत बढ़िया लघुकथा हुई है. इस प्रस्तुति ह…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय योगराज सर, वर्ण व्यवस्था की जड़ें कितनी गहरी है, इस मर्म को अभिव्यक्त करती इस…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 29, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"“लक्ष्मी तुम काम में बेईमानी करोगी तो नर्क में जाओगी।” मैंने लक्ष्मी से चुहल की। “मै…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 28, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-5 (विषय: परिभाषा)

1028 Aug 31, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय बागी सर,  'डॉ धनेश कुमार' जी की इस उपलब्धी पर आपको बधाई और आदरणीय धनेश भाई जी…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 23, 2015 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय सुनील जी बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने. शेर दर शेर दाद हाज़िर है- है शाद दिल ये बहुत…"

मिथिलेश वामनकर replied Aug 22, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-62

440 Aug 22, 2015
Reply by shree suneel

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सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
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  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
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दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
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दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

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