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प्रधान संपादक

"काश हर पिता आपकी लघु कथा जैसा  हो तो नारियों की स्थिति खुद ब खुद मजबूत हो जाए  मजा आ…"

rajesh kumari replied Oct 30, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-7 (विषय: शतरंज)

1332 Nov 1, 2015
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"आज कल लडकियाँ भी इतनी नादान  नहीं  रही  कि आसानी से  झांसे  में आ जाए और ये आज की आव…"

rajesh kumari replied Oct 30, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-7 (विषय: शतरंज)

1332 Nov 1, 2015
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"नेता जी और ठाकुर जी की बिछाई बिसात में फंसते भोले भाले ग्रामीण ..यही तो अक्सर होता ह…"

rajesh kumari replied Oct 30, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-7 (विषय: शतरंज)

1332 Nov 1, 2015
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"पुस्तकालय की शतरंज    “आज  अभी तक कोई भी नहीं आया  ताज़ी हवा भी नहीं मिली  न जाने कैस…"

rajesh kumari replied Oct 30, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-7 (विषय: शतरंज)

1332 Nov 1, 2015
Reply by Saurabh Pandey

"आ०  शेख़ साहब ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ आपका दिल से बहुत बहुत शुक्रिया |"

rajesh kumari replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई है हर शेर नायाब मोती की तरह है किसी एक की क्या बात करूँ बस बा…"

rajesh kumari replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बेहतरीन मतला  रह जाती गुलामी ही भारत के मुकद्दर में नेज़ोंं पे जो दुश्मन के सर अपने न…"

rajesh kumari replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"जिनके लिए खुदा के दर अपने नहीं होते|---इसकी बह्र फिर से जांच लें  जीना मुहाल होता गर…"

rajesh kumari replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"चाहें तुम अपनी जां भी इन पर लुटा दो पर I ज़ोरू ये ज़मीं 'औ' ये ज़र अपने नहीं होते I I--…"

rajesh kumari replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आ० शेख़ शहज़ाद जी ,ग़ज़ल के भाव तो बहुत अच्छे हैं मगर बह्र के लिहाज से संतुष्ट नहीं कर स…"

rajesh kumari replied Oct 24, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
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सदस्य टीम प्रबंधन
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"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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