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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions (2,690)

Discussions Replied To (2131) Replies Latest Activity

सदस्य टीम प्रबंधन

"धन्यवाद राणा भाई। हौसला अफ़जाई का शुक्रिया।"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 21, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"बहुत बहुत धन्यवाद प्रीतम जी"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 21, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"मुझे लगा आप कह रहे हैं बैंकों की जगह बंकों और खाता की जगह ख़ाता होना चाहिए।"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 21, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"त्रुटियों की तरफ़ ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद नवीन भाई। आप जैसे मित्रों की बेबाक राय…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 21, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

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"अनुपमा जी रचना तो बहुत अच्छी है। भाव, बिंब सब बढ़िया है। थोड़ी सी कोशिश और कीजिए तो ये…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 21, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

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"सारे ही शेर एक से बढ़कर एक हैं। किस किस की तारीफ़ करूँ। बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बधाई।"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 21, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

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"जब मुक्तक ही इतने शानदार हैं तो ग़ज़ल कैसी होगी? राणा जी ग़ज़ल कहाँ छुपा के रखी है? उसे…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 21, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

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"एक और सुन्दर ग़ज़ल। बधाई"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 20, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"सुन्दर रचना के लिए बधाई। लिखते रहिए, पढ़ते रहिए धीरे धीरे बहर में आ जाइएगा। बधाई।"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 20, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"मुझे देना पड़ेगा कब तलक ये इम्तेहाँ बतला सताने से सुना है सख्त जाँ भी टूट जाता है क…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 20, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

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