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वीनस केसरी's Discussions (2,462)

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"हमेशा की तरह एक और शानदार तरही ग़ज़ल ..... खूबसूरत ग़ज़लों का सिलसिला यूँ ही चलता रहे ..…"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"बेहद शानदार ,,, जिंदाबाद ग़ज़ल हुई है ... कहन की बुलंदी को अरूज़ की चाशनी में पगा कर आप…"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"गुनगुनाती ये हवा चाँदनी ओढ़े पत्ते क्यूँ लगे है कि तेरी याद में जल जाऊँगी   आग के दरि…"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"वाह भाई मुरस्सा ग़ज़ल हुई है ..जाने किस दौर के वो लोग थे जो कहते थे!'ठोखरें खा के मुहब…"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"ज़नाब शानदार ग़ज़ल हुई है ... ढेरो दाद क़ुबूल फरमाएं"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"नाम अल्लाह का लेकर मै निकल जाऊँगा  मै तो हालात का मारा हूँ, संभल जाऊँगा | ... अच्छा…"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"आदरणीय ग़ज़ल तो खूब हुई है मगर मुझे लगता है कुछ कसर बाकी रह गयी है ...मुझे मतला के दोन…"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"हसरतें क़ैद में रखने से न पूरी होंगी मै हवा बन के कहीं से भी निकल जाउंगा ........ वाह…"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"तरही ग़ज़ल पेश-ए-ख़िदमत  है ... मैं शिला से, अभी दर्पण में बदल जाऊँगा पर है दावा, पसे-म…"

वीनस केसरी replied Jan 25, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-43

720 Jan 27, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"हुजूरे आला हम आप तो मखाना मखाना भाई भाई हो गया ... हा हा हा एक एक शेर पर सौ सौ दाद ह…"

वीनस केसरी replied Dec 29, 2013 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 42 (Now Close)

820 Dec 29, 2013
Reply by Saurabh Pandey

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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
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