For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विनय कुमार's Discussions (1,589)

Discussions Replied To (1553) Replies Latest Activity

"// मैं तो औरत हूँ, किन्तु तुम मर्द तो नहीं हो //, मर्द होने का कौन सा पैमाना है ये ,…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"नारी कुछ भी कर ले उसकी पहचान पुरुष से ही है , अब ये मिथक टूट रहा है । बहुत अच्छी लघु…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"अच्छी भावपूर्ण लघुकथा , वास्तव में असली माँ तो वही है जो संतान को पाले , सिर्फ जन्म…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"एक बढ़िया विषय पर बेहतरीन प्रस्तुति । जो सरकार हमारे घर नहीं बचा पायी वो हमें छत क्या…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"समय और परिस्थिति से पहचान बदल जाती है , आपकी लघुकथा ने इस चीज को बहुत बेहतरीन तरीके…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"बहुत बेहतरीन लेखन // तिरंगे की शान के लिये तो हम भारतीय ही रहेगें//। एक बेहद ज्वलंत…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"एकतरफा प्रेम और अगर कोई एक पक्ष जज्बातों से खेलने वाला हो तो कमोबेश यही अंजाम होता ह…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"आज के समाज की एक तल्ख़ हक़ीक़त , पता नहीं कितनी नताशा हर रोज़ पैदा होती हैं । एक संवेदनश…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"अलग अलग जगह , अलग अलग पहचान । बढ़िया प्रस्तुति , बधाई आदरणीय.."

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"बचपन में पुत्र पिता से पहचाना जाता है और बुढ़ापे में पिता पुत्र से । और ऐसे में पिता…"

विनय कुमार replied May 31, 2015 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-2 (विषय: पहचान)

882 May 31, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
5 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
7 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
9 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
10 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
10 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
10 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
11 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
11 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"प्यादा एक बिम्ब है जो समाज के दरकिनार लोगों का रूप है। जिसके बिना कोई भी सत्ता न कायम हो सकती है न…"
11 hours ago
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
11 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service