For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिनेश कुमार's Discussions (883)

Discussions Replied To (834) Replies Latest Activity

"अच्छी ग़ज़ल के लिए मेरी तरफ़ से भी दाद हाज़िर है आ. भाई शिज्जू साहब। वाह वाह"

दिनेश कुमार replied Sep 23, 2017 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87

581 Sep 23, 2017
Reply by Gajendra shrotriya

"बहुत उम्दा साहब। क्या कहने हैं। वह वाह वाह। क़ासिद वाला विशेष रहा।"

दिनेश कुमार replied Sep 23, 2017 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87

581 Sep 23, 2017
Reply by Gajendra shrotriya

"ज़ब्त कर पाऊँ न ग़म, अश्क बहा भी न सकूँ क्या करूँ गर मैं उसे दिल से भुला भी न सकूँ…"

दिनेश कुमार replied Sep 23, 2017 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87

581 Sep 23, 2017
Reply by Gajendra shrotriya

"उम्दा ग़ज़ल के लिये पुनः दिल से बधाई आ. निलेश सर । वाह वाह।"

दिनेश कुमार replied Sep 23, 2017 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87

581 Sep 23, 2017
Reply by Gajendra shrotriya

"बहुत उम्दा। हमेशा की तरह। मफ़हूम, रवानी, अंदाज़े बयां, सब लाजवाब आ. समर कबीर सर। तहे द…"

दिनेश कुमार replied Sep 23, 2017 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87

581 Sep 23, 2017
Reply by Gajendra shrotriya

"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. महेंदर जी। वाह वाह गिरह में शायद ऐब शुतुरमुर्ग आ गया है शायद।"

दिनेश कुमार replied Jun 24, 2017 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84

176 Jun 24, 2017
Reply by Mahendra Kumar

"दुनिया के रंग-मंच पे आ कर चले गये किरदार जो मिला था निभा कर चले गये कितने ही नामदेव…"

दिनेश कुमार replied Jun 23, 2017 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84

176 Jun 24, 2017
Reply by Mahendra Kumar

सदस्य टीम प्रबंधन

"इसी प्रकार ' क्या ' को क्या हम 1 मात्रा पर ले सकते हैं आ."

दिनेश कुमार replied Jun 21, 2017 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 74 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

11 Jun 22, 2017
Reply by Rana Pratap Singh

सदस्य टीम प्रबंधन

"शुक्रिया आ. राणा प्रताप जी। मेहरबानी। इनायत। मेरी याददाश्त बहुत कमज़ोर हो गई है। इसलि…"

दिनेश कुमार replied Jun 21, 2017 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 74 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

11 Jun 22, 2017
Reply by Rana Pratap Singh

सदस्य टीम प्रबंधन

"आदरणीय एक संशय और हुआ है क्यूँ अभी से जा रहे हो,ज़रा आसमाँ तो देखो Kya क्यूँ ko 1 म…"

दिनेश कुमार replied Jun 21, 2017 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 74 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

11 Jun 22, 2017
Reply by Rana Pratap Singh

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
17 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
20 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service