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Tilak Raj ji

Pahle baar Pathshal mein aai hoon. Sadar namaskar. Is manch ko kaise handle karoon yahi seekhne ke prayaas mein joojh rahi hoon.

Devi Nangrani

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Replies to This Discussion

आप तो ग़ज़ल विधा में अच्‍छा खासा अनुभव रखती हैं इसलिये अधिक संभावना तो यही कि जब जब प्रश्‍न उठेंगे आपका योगदान चर्चा में महत्‍वपूर्ण हो जायेगा। आपसे पहले भी एकाधिक बार इस विषय पर चर्चा हुई है कि हिन्‍दी में ग़ज़ल विषय पर बिखरा-बिखरा बहुत कुछ है। कुछ गंभीर प्रयास हुए भी हैं इस विषय पर पुस्‍तकों व इंटरनैट के माध्‍यम से लेकिन उनमें भी पूर्णता का अभाव है। कोई ऐसी पुस्‍तक भी नहीं है जिसे मानक माना जाता हो। परिणाम यह होता है कि जब कोई ग़ज़ल प्रकाशित होती है तो जिसे जो ज्ञात होता है उसके अनुसार दोष बता देता है। क्‍यों न ऐसे सभी विधि विधान एकजाई कर प्रकाशित कर दिये जायें।

चर्चा से बहुत सी बातें सामने आने की संभावना के आधार पर मैं इस प्रकिया से जुड़ा हूँ और सफलता की कामना करता हूँ।

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