Ye saari duniya kehti hai k kisi ek k jaane se zindgi ruk nahi jati.. Lekin ye koi nahi jaanta k laakhon k mil jaane se bhi uss ek ki kami poori nahi ho paati
At 4:09pm on November 21, 2011, Abhinav Arun said…
anshu ji aapka o b o par hardik swagat hai aapke aagman se yah manch sammridh hoga . aapki baat main prabandhan tak pahuncha deta hoon .thanks
आदरणीया अंशु जी, सादर अभिवादन, यह चित्र बिलकुल यथार्थ है, "मौत का कुआँ" नामक खेल में बिलकुल ऐसा ही होता है, मैंने तो इसे अपने आँखों से देखा है, इसमें मुझे कोई trick फोटोग्राफी नहीं लगा खैर मैं बताना चाहता हूँ कि यहाँ इस चित्र का उद्देश्य केवल साहित्यकारों को एक विषय प्रदान करना है जिसपर वो काव्य सृजन कर सके | पत्र लेखन हेतु आपका आभार |
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
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Ye saari duniya kehti hai k kisi ek k jaane se zindgi ruk nahi jati..
Lekin ye koi nahi jaanta k laakhon k mil jaane se bhi uss ek ki kami poori nahi ho paati
anshu ji aapka o b o par hardik swagat hai aapke aagman se yah manch sammridh hoga . aapki baat main prabandhan tak pahuncha deta hoon .thanks
मुख्य प्रबंधकEr. Ganesh Jee "Bagi" said…
आदरणीया अंशु जी, सादर अभिवादन, यह चित्र बिलकुल यथार्थ है, "मौत का कुआँ" नामक खेल में बिलकुल ऐसा ही होता है, मैंने तो इसे अपने आँखों से देखा है, इसमें मुझे कोई trick फोटोग्राफी नहीं लगा खैर मैं बताना चाहता हूँ कि यहाँ इस चित्र का उद्देश्य केवल साहित्यकारों को एक विषय प्रदान करना है जिसपर वो काव्य सृजन कर सके | पत्र लेखन हेतु आपका आभार |
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