For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम्हारे लिए

 

खुद हो के बेरंग, क्यों दुनिया के लिए रंग लाती हो ?

अपनी मंज़िल भूलकर, क्यों दूजे की राह सजाती हो ?

जो बीत गया वो फिर लौट के न आनेवाला

यकीन कर लो मेरा, क्यों अपनी जान जलाती हो ?

सच तुम कहती हो ये दुनिया बड़ी मतलबी है

मैने देखा तुमने देखा, क्यों बीती बात जगाती हो ?

मिलना - बिछड़ना  है  किस्मत की आँख- मिचोली  

स्वीकार कर लो यही बेहतर, क्यों नैनो को रूलाती हो ?

सफ़र ख्वाब का कभी रुका नहीं, रोज नये रूप मे मिलता  

सत्य यही जीवन का है, क्यों  नयी सुबह ठुकराती हो ?

(कृति - बब्बन जी, २५ जून २०१३, सेवाग्राम )

------------------------------------------

मौलिक एवं अप्रकाशित

------------------------------------------

 

 

 

 

Views: 403

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shyam Narain Verma on June 29, 2013 at 4:46pm

बहुत ही सुंदर व मर्मस्पर्शी रचना....................

Comment by Sumit Naithani on June 28, 2013 at 3:54pm

मिलना - बिछड़ना  है  किस्मत की आँख- मिचोली  

स्वीकार कर लो यही बेहतर, क्यों नैनो को रूलाती हो ?...बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ 

Comment by Priyanka singh on June 28, 2013 at 2:31pm

सुंदर.....आपको बधाई !

Comment by विजय मिश्र on June 28, 2013 at 1:09pm
सांत्वना भरे मीठे उलाहनों से भरी मानवीय संबंधों को दुलारती-पुचकारती एक मन बाँधने और ढाढस बँधाने वाली सुंदर कविता . कविवर ! बधाई .
Comment by रविकर on June 28, 2013 at 9:45am

बहुत बढ़िया आदरणीय-

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 27, 2013 at 10:16pm
"खुद हो के बेरंग, क्यों दुनिया के लिए रंगलातीहो ?

अपनी मंज़िलभूलकर, क्यों दूजे की राह सजाती हो ?

जो बीत गया वो फिर लौटके न आनेवाला

यकीन करलो मेरा, क्यों अपनी जानजलाती हो ?"...आदरणीय..डा.बब्वन जी, भावनाओ से ओतप्रोत वास्तविकता ली हुई पंक्तियां..शुभकामनाऐं
Comment by वेदिका on June 27, 2013 at 9:44pm

बढ़िया प्रयास पर बधाई!! 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 27, 2013 at 7:46pm

आ0 बब्बन भाई जी, ’सफ़र ख्वाब का कभी रुका नहीं, रोज नये रूप मे मिलता
सत्य यही जीवन का है क्यों नयी सुबह ठुकराती हो?’.....बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। बधाई स्वीकारें। सादर,

Comment by D P Mathur on June 27, 2013 at 7:19pm

खुद हो के बेरंग, क्यों दुनिया के लिए रंग लाती हो ?
अपनी मंजिल भूलकर, क्यों दूजे की राह सजाती हो ?
आदरणीय बब्बन जी नमस्कार ,सीख भरी इस सुन्दर रचना के लिए आपको बधाई !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service