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विकल्प  (लघुकथा)

"मास्टर जी, अब तो पानी सिर के ऊपर हो गया। अब हमारे सामने हथियार उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।"

"नहीं नासिर, ऐसा कुछ भी नहीं है।आजतक दुनियाँ में हथियार से कोई भी समस्या हल नहीं हुई| अभी भी बहुत विकल्प हैं।"

"सर जी, स्थिति कितनी भयानक हो चुकी है, आपको अहसास नहीं है। हमारी क़ौम को कुचला और दबाया जा रहा है।"

"यह सिर्फ़ एक पहलू है। तुम्हें बार बार यही पाठ पढ़ाया जा रहा है। लोग तुम्हारा और तुम्हारी कौम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बचो|"

"आप के हिसाब से  इस समस्या का हल कैसे निकाला जाय?"

"अभी हमें शाँति से उनके किये जा रहे प्रयासों का मूल्याँकन करना होगा। यह तो तुम भी देख रहे हो कि इस बीच कोई जन हानि  नहीं हो रही है।"

"लेकिन आर्थिक हानि तो हो रही है। काम धंधा सब चौपट हो रहा है। शिक्षण कार्य ठप्प है।"

"इन सब की भरपाई भविष्य में संभव है। एक बार इनकी नीयत क्या है, यह स्पष्ट हो जाय?"

"सर जी, इतना सब्र नहीं है लोगों में। बगावत के सुर खुल कर उभर रहे हैं।कभी भी स्थिति विस्फ़ोटक हो सकती है।"

"नहीं नासिर, यह क़दम हमारे लिये आत्मघाती साबित होगा। इसे रोकना होगा|"

"तो आखिर हम क्या करें? लोग हमारी ओर बेचैनी से देख रहे हैं।"

"हमारे लिये  सब्र और शाँति से बेहतर कोई दूसरा विकल्प  नहीं है।"

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on September 7, 2019 at 2:54pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।आदाब।

Comment by Samar kabeer on September 7, 2019 at 11:38am

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,बहुत उम्द: लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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