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ज़िन्दगी तुझे जी लुंगी मैं..

ज़िन्दगी तुझे जी लूंगी मैं...

 

नाकामियों से ऊपर उठते हुए,

समय के आगे न झुकते हुए,

मुश्किलों से हंस कर मिलूंगी मैं!

ज़िन्दगी तुझे जी लूंगी मैं...

 

रुठेंगी कब तक मंजिलें मुझसे,

मायूस होगी कब तक महफ़िलें मुझसे,

तूफ़ान भी अब डिगा न सकेंगे,

लहरों के वेग से अब न डरूँगी मैं!

ज़िन्दगी तुझे जी लूंगी मैं...

 

भिगोया हैं बहुत आँचल को अपने,

अरसा गुज़र गया मुस्कुराहटो की तलाश में,

अब भीगी पलकों पर सपनो को जगाना है,

आसमान को क़दमों में झुकाकर रहूंगी मैं!

ज़िन्दगी तुझे जी लूंगी मैं...

 

सुन ले ज़माना, समझ भी लें  जरा,

राहों से मेरी हट लें अब ज़रा,

चुप्पी को न मेरी हार समझना,

सहमी सी हर पल अब न रहूंगी मैं,

मुस्कुरा कर, आगे बढकर, ज़िन्दगी तेरे गले लगूंगी मैं!

ज़िन्दगी तुझे जी लूंगी मैं...

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Comment by satish mapatpuri on June 28, 2011 at 5:31pm

भिगोया हैं बहुत आँचल को अपने,

अरसा गुज़र गया मुस्कुराहटो की तलाश में,

अब भीगी पलकों पर सपनो को जगाना है,

आसमान को क़दमों में झुकाकर रहूंगी मैं!

ज़िन्दगी तुझे जी लूंगी मैं...

इस जज्बा को सलाम करता हूँ. बड़े खुबसूरत ख्याल हैं, बधाई.
Comment by Vasudha Nigam on June 28, 2011 at 3:37pm
आभार...

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 28, 2011 at 3:35pm

इस सद्प्रयास पर मेरी शुभकामनाएँ.

Comment by Rash Bihari Ravi on June 28, 2011 at 3:13pm

नाकामियों से ऊपर उठते हुए,

समय के आगे न झुकते हुए,

मुश्किलों से हंस कर मिलूंगी मैं!

ज़िन्दगी तुझे जी लूंगी मैं...

 

vah kya bat hain lajabab

 

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