For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तेरी मेरे कहीं कुछ कहानी तो है

ग़ज़ल:


तेरी मेरी कहीं कुछ कहानी भी है
प्यार में तैरती ज़िन्दगानी भी है

मत डरो देख तुम इस जमन की लहर
रासलीला तुम्हीं संग रचानी भी है

आँसुओं से नहाती रही उम्र-भर
तू ही चंपा मेरी रातरानी भी है

फूल जब मुस्कुराएँ तो समझा करो
इन बहारों में अपनी जवानी भी है

बाँध मत प्यार की बह रही है नदी
है रवाँ जिसमें उल्फ़त का पानी भी है

साथ देता हमेशा रहा हमसफ़र
ज़िन्दगी इसलिए तो सुहानी भी है

अब न छोड़ेगा तुमको अकेला 'अमर'
ज़िंदगी साथ हमको बितानी भी है

अमर पंकज
(डाॅ अमर नाथ झा)
देहली यूनिवर्सिटी

मौलिक और अप्रकाशित 

Views: 52

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha) on June 12, 2019 at 12:06pm

आदरणीय दंडपाणी नाहक साहेब। आपको ग़ज़ल पसंद आई। हमारा आभार स्वीकार करें। धन्यवाद। 

Comment by Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha) on June 12, 2019 at 12:04pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब, प्रणाम। आपने ग़ज़ल पढ़ी और अपनी बहूमूल्य टिप्पणी दी, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। आपके कहे अनुसार एक शेर के मिसरा- सानी में बदलाव करता हूँ। दूसरा और तीसरा शेर मुझे बहुत प्रिय है, अतः उनमें सुधार की कोशिश करता हूँ। 

यूँ ही आपका आशीर्वाद बना रहे। प्रणाम। 

Comment by dandpani nahak on June 9, 2019 at 10:03am
आदरणीय डॉ अमर नाथ झा जी आदाब बहुत अच्छा प्रयास हुआ है ग़ज़ल का हार्दिक बधाई स्वीकार करें
Comment by Samar kabeer on June 7, 2019 at 6:41pm

जनाब अमर पंकज जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

दूसरे और तीसरे शैर के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,उन्हें हटा दें ।

'ज़िंदगी अब तलक ये सुहानी भी है'

इस मिसरे को यूँ कर लें:-

'ज़िन्दगी इसलिए तो सुहानी भी है'

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on बृजेश नीरज's blog post धारा
"सिक्का अगर खोटा हो तो उसके दोनों पहलू खोटे होते हैं. इस बात की तस्दीक करती इस रचना के लिए हार्दिक…"
13 minutes ago
Sushil Sarna posted blog posts
1 hour ago
नयना(आरती)कानिटकर posted a blog post

मैं और मेरा मन

पहन रखा हैं  मैने गले में, एकगुलाबी चमक युक्त बडा सा मोती जिसकी आभा से दमकता हैं       मेरा…See More
5 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 212हुस्न का बेहतर नज़ारा चाहिए ।कुछ तो जीने का सहारा चाहिए ।।हो मुहब्बत का यहां पर श्री…See More
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"vijay nikore साहेब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला आफजाई के लिए | "
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

-ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-

ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टारबंद करो ये अत्याचारनज़रो में वहशत है पसरीजीना बच्चों का दुश्वारशहर नया हर…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

औरत.....

औरत.....जाने कितने चेहरे रखती है मुस्कराहट थक गई है दर्द के पैबंद सीते सीते ज़िंदगी हर रात कोई…See More
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब अच्छि गज़ल  हुई ।बधाई"
Tuesday
Pradeep Devisharan Bhatt shared Naveen Mani Tripathi's blog post on Facebook
Tuesday
vijay nikore commented on बृजेश नीरज's blog post धारा
"रचना अच्छी लगी, बधाई बृजेश जी"
Tuesday
vijay nikore commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"गज़ल अच्छी लिखी है। बधाई गिरधारी सिंह जी"
Tuesday
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हरि ओम जी, छ्न्द अच्छे लगे। बधाई।"
Tuesday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service