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एक ग़ज़ल मनोज अहसास

22 22 22 22 22 22 22 2

तुम ही बताओ साधु फकीरों तुमने तो देखा होगा ।
इस झूठी दुनिया का वो सच्चा मालिक कैसा होगा ।

जिसकी सोच के हर कतरे में मौत का खौफ समाया हो ,
सोच के देखो दुनिया वालों कैसे वो जीता होगा ।

जिस रास्ते पर चलते चलते मैं तुझको भी भूल गया ,
वो रस्ता तू समझ ले दिलबर कितना पथरीला होगा।

पल पल अपने जीवन का बस इस चिंता में घुलता है ,
बीते कल में ऐसा क्यों था ,आते कल में क्या होगा ।

धोखे ने सौ शक्लें बदली बिल्कुल तोड़ दिया मुझको,
इक दिन ऐसा भी होगा ,जब धोखे को धोखा होगा

होती सच की जीत अंत में मन रखने की बात है ये,
हार के बाजी इसी झूठ संग हमको भी जीना होगा।

तेरे मन में क्या था आखिर ये तो कहना मुश्किल है,
किसी वक्त में शायद हमको तुझसे इश्क रहा होगा।

मौलिक और अप्रकाशित

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