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'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212     1122     1212      22

ग़ज़ल

उठा है ज़ह्न में सबके सवाल,किसकी है

तू जिस पे नाच रहा है वो ताल किसकी है

खड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकर

हमारे सामने आए मजाल किसकी है

ज़रा सा ग़ौर करोगे तो जान जाओगे

वतन को आग लगाने की चाल किसकी है

हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा

लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी है

कभी तो सोच,कभी तो ख़याल कर इसका

तू जिसके पीछे है महफूज़,ढाल किसकी है

"समर कबीर"

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on December 10, 2023 at 12:23pm

बहुत-बहुत शुक्रिय: प्रिय euphonic amit  ।

Comment by Euphonic Amit on December 6, 2023 at 9:19am

बिहतरीन ग़ज़ल आदरणीय उस्ताद-ए-मुहतरम। वाहह वाह। सादर चरण स्पर्श 

Comment by Samar kabeer on February 1, 2019 at 12:01am

जनाब फूल सिंह जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

Comment by Samar kabeer on February 1, 2019 at 12:01am

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

Comment by Samar kabeer on January 31, 2019 at 11:59pm

जनाब राज़ नवादवी जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

Comment by Samar kabeer on January 31, 2019 at 11:58pm

जनाब तस्दीक़ अहमद ख़ान जी  आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

Comment by Samar kabeer on January 31, 2019 at 11:57pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी  आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

Comment by Samar kabeer on January 31, 2019 at 11:57pm

जनाब अनीस शैख़ जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

Comment by Samar kabeer on January 31, 2019 at 11:56pm

जनाब महेंद्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

Comment by Samar kabeer on January 31, 2019 at 11:55pm

जनाब अजय तिवारी जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

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