For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इस नशेमन की मोहलत है तबतक...

बह्र:-2122-1221-22

वक्त बे वक्त का आसरा है।।
घर का टुटा हुआ जो घड़ा है ।।1

  जो  मुहब्बत में अपनी बिका है।
उसको दौलत ओ शुहरत से क्या है ।।2

जब समझलो की क्या माजरा है।
बोल बोलो नही कुछ बुरा है।।3

प्यास बुझ जाए हर सोच कर ये।
जंग प्रतिदिन तपन की लड़ा  है।।4

बोल बोलो नहीं कुछ बुरा है ।।
माजरा पर समझ लो की क्या है ।।5

किसकी किस्मत में क्या क्या लिखा है ।।
जान पाना ये मुश्किल बड़ा हैं।।6

कामयाबी में  तेरी हूँ हैरां।
इतनी सिद्दत से रुख को पढ़ा है ।।7

जिस में है हौसला जूझने का ।
दौरे हाजिर में अब भी खड़ा है ।।8

इस समर्पण नियम को समझ लो ।
जो मृदा से मिला वो उगा है।।9

मंजिले भी कदम चूमती हैं।
कर गुजरने का गर हौसला है।।10

लत नशे की न लग पाए बच्चों।
दूर रहना मेरा मश्विरा है।।11

जिन्दगी भर कमाया बहुत पर ।
साथ में आखरी बस दुआ है।।12

एक दिन मौत आनी है सबको।
डर जेहन पाल रखना बुरा है।।13

लाख तरहा उन्हें है बताया।
मुझको उनका ही इक आसरा है।।।14

मौत का खेल खेले जो  कोई ।
लोग कहते उसे सर फिरा है ।।15

क्या शिकायत करू हम सफ़र मै।
तू चिरागों की तरहा जला है।।16

पी के मदिरा जो न लडखडाये।
यार आशिक वो मय का बड़ा है।।17

पूछ ले कश्तियों से समन्दर ।
हर सफ़र का तज्रिबा भरा है ।।18

शब्द लेती है इक दायरे में।
ये गजल भी गजब की बिधा है।।19

साथ अहसास ले कर फलक तक ।
जो उड़े वो गजल की बिधा है ।।20

हाले दिल है ,बयां कर गया है ।
ख़त जो सूखे सजर सा पड़ा है।।21

हो सुनहली प्रभा की यूँ आमद।
जैसे गुल में, ये अदबी हया है।।22

ख्वाहिशे गर मिटा दी तो हमदम।
जिंदगी जीना मुश्किल बड़ा है।।23

जिंदगी उससे इकदम अलग है ।
जो किताबों में मैंने पढ़ा है।।24

प्यास अब तक जो उलफत की जिन्दा।
तिश्नगी का भी अपना मजा है।।25

इतने अहसास दिल में दफन हो।
ज्यो फलक चाँद तारों सजा है।।26

हो कभी न कोई भी यूँ रुसवा।
ज्यों जमी आसमां से जुदा है।।27

उनका नजरें मिलाकर झुकाना
है लियाकत की या फिर हया है।।28

बुझ न पायी वो लौ अब भी रोशन ।
जिसमें सच का उजाला भरा है ।।29

याद तेरी सताएगी मुझको।
याद ही पर मेरा आसरा है।।30

जिंदगी ये सबब तीरगी का।
देख दीपक तले ही दबा  है।।31

जब भी कोशिश किया हम भी हँस ले।
जाम दरदां मयस्कर हुआ है।।32

इश्क की चोट खाई जिगर में।
तब लगा के मुहब्बत दगा है।।33

बदजुबानी करो कर सको यदि।
प्यार में बस यही अब बचा है।।34

शौख मेरा नही है मुहब्बत ।
ये मौहब्बत मेरा हौसला है।।35

हर कदम पर यूं न मुस्कुराओ ।
मुस्कुराहट भी देती सजा है।।36

अब अदा से हया से वफ़ा से।
कोई रिश्ता न मेरा रहा है।।37

फूल कलियां जरा मुस्कुरा दी।
कोई ऐसी कहानी कहा है।।38

आग पानी हुए साथ हैं कब ।
गर हुए तो हुआ जलजला है।।39

दौड़ में जिंदगी की भी देखो।
जो गिरा वो गिरा रह गया है ।।40

किसको किसने उठाया है अब तक ।
जो उठेगा वो खुद हौसला है।।41

  रौशनी की जरुरत अंधेरा।
आँधियों का मजा गर दिया है।।42

इस नशेमन कि मोहलत है तब तक।
अपने पैरों में जब-तक खड़ा है।।43

मौलिक/ अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी

Views: 414

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by amod shrivastav (bindouri) on February 12, 2018 at 10:45am

आ शोमेस जी आप का बहुत आभार की रचना आप को पसंद आयी ....आप से बिनती है कि आप अपनी लव स्टोरी में अपनी रचनाये ही डाले , ये वेब या कोई जगह से किसी का कॉपी पेस्ट न करें । ये सिर्फ मेरी भावनाये है गलत भी हो सकती हैं । समाज को एक नए सृजन की अवस्यकता है न की ...जो नए विचार से भरें हो ।मैं अपनी रचनाओं में वो सब नहीं पाता । तो इस लिए मैं आप को ये अनुमति नहीं दे रहा ...की  मेरे शब्दों को अपनी रचना ,ख्याल, सृजन, में सामिल करे...क्षमा चाहेंगे

Comment by somesh kumar on February 12, 2018 at 10:30am
ऐसा लगा की रंग-बिरंगे मोतियों को सजाकर एक प्यारी सी माला बना दी हो
जब तपे हो आग में तो
ये कुंदन बना है
एक लव स्टोरी दिमाग में चल रही है अगर आप को आपत्ति न हो तो एकाध शेर वहां प्रयोग करना चाहूंगा

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
19 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service