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कितना बदल गया इंसान

जाने क्या हो गया है
आजकल के इंसान को .
पेड काट के आता है
बिल्डिंग बना जाता है|

मार्बल मकराना पत्थर
खूब अच्छे से पहचानता है
बस बुढे बाप की
बढ़ती पथरी नहीं देख पता |

स्वार्थ जलन मोह धन वासना
लक्ष बन जाता है
गौर से देखो यारो इंसान
जानवर से भी पीछे नज़र आता है |



लेखक :- आनंद वत्स .

सह्रदय आभार- आदरणीय बब्बन पाण्डेय जी ..आपसे प्रेरणा मिली है |

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Comment

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Comment by Smita singh deo on July 12, 2010 at 12:43pm
VERY NICE MY FRIEND.DHARTI KA CHEER HARAN KIS PRAKAR HO RHA HAI YE USKA HI EK ROOP HAI.JO AAPNE APNI KAVITA DWARA VYAQT KIYA HAI....LIKHTEY RHIYA...LIKHTEY RHIYA ........

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 10, 2010 at 10:40pm
मार्बल मकराना पत्थर
खूब अच्छे से पहचानता है
बस बुढे बाप की
बढ़ती पथरी नहीं देख पता |
Anand bhai bahut khub kaha hai aapney, manviya mulyo ka badi teji sey hashra ho raha hai, bahut sunder rachna,

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 28, 2010 at 12:09pm
बहुत सुंदर विचार और उतनी ही अच्छी अभिव्यक्ति आनन्द वत्स भाई ! समाज में निरंतर गिरते हुए मूल्यों का बहुत अच्छा चित्रण किया है - लिखते रहिए !
Comment by baban pandey on June 27, 2010 at 7:49am
waah. Anand bhai waah...
गौर से देखो यारो इंसान
जानवर से भी पीछे नज़र आता है |...very good finish bahut hi achcha samapan...badhai..

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