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हे भगवन तू कईसन दिन दिखावाला ,

हे भगवन तू कईसन दिन दिखावाला ,
आज से बीस साल पाहिले बबुनी जनमली ,
दहेज़ के बात होत रहे हजार में ,
ओ घरी इंजिनियर डाक्टर कलक्टर ,
मिळत रहले चालीस पचास हजार में ,
हमहू सोचनी बैंक में पैसा ,
बीस साल में होई आठ गुना ,
लाईकानो के भाव बढ़ी लउकत बा नमूना ,
ता हम ओ घरी सतर हजार जमा करवानी ,
एही साल पाच लाख साठ हजार पावनी ,
बाकिर इ कम पर गइल,
ऊपर वाला लेकन के भाव ,
बीस लाख के ऊपर चल गइल ,
जवान हमारा लगे पैसा रहे ,
ऊपर से महंगाई के मार ,
पिउन दामाद मिलल उहो सरकारी ,
अब सोची ले हम अपना बेटिया के ,
येताना पढ़वानी,
ऊपर से ओकरा सादी में ,
सब कुछ लुटावानी,
हमारा बेटिया के बेटा कहे न बनवाला ,
हे भगवन तू कईसन दिन दिखावाला ,

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on September 6, 2010 at 6:30pm
करारी चोट की है गुरु जी अपने अपनी लेखनी के माध्यम से| समाज जागृत हो रहा है परन्तु अभी स्थिति बहुत ख़राब है|
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on March 27, 2010 at 7:52pm
bahut badhiay guru jee......dahej sahi me bahut bara burayi baa........lekin kail bhi kaa jaa sakat baa..ekra khatir sabke ek jut hokhe ke pari jaun ki bahut muskil baa.....

bahut badhiya guru jee....aisehi agar likhe wala kranti bhi hokho ta dahej [ratah ke khatam kare ke bahut madad mili.....
bahut shaandaar guru jee aisa hi likhat rahi/////

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 27, 2010 at 7:50pm
गुरु जी, रौवा जवन आपन कविता के माध्यम से समाज के बुराई दहेज़ के तरफ सबकर ध्यान आकृस्त कैनी हा उ काबिले तारीफ़ बा , दहेज़ रूपी दानव आज के समय मे बुद्धिजीवी वर्ग के भी सोचे पर मजबूर कर देत बा की हे भगवान् काहे लइकी दिहल ह लइका काहे ना .

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