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ग़ज़ल :मीआ़दे उल्फ़त देखिये

2212 2212 2212


मीआ़दे उल्फ़त देखिये पूरी हुई
इतनी सी तब तो बात अब उतनी हुई.

क्या इश्क़ में दुनिया से तू भी तंग है
क्या तंज़ तुझ पे भी मेरे जैसी हुई.

दौरे गुज़श्ता ने असर कुछ यूँ किया
टूटा हुआ मैं,तू भी है टूटी हुई.

पाया है जो मेयार तेरे इश्क़ ने
लो! ज़िन्दगी क्या! रूह भी तेरी हुई.

ऐ चाँद! मुझको खींच ले ख़ुद की तरफ़
देखूं कि छत पे होगी वो आई हुई.

उनसा खिला गमले में इक तो गुल, अरे!
ख़ुशबूू भी उसमें हू ब हू उनसी हुई.

श्री सुनील

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 1165

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Comment by shree suneel on July 7, 2015 at 5:57pm
आदरणीय गिरिराज सर जी, ग़ज़ल की सराहना के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया.
इंगित मिसरे या शे'र में मैं ये कहना चाह रहा हूँ आदरणीय कि इश्क़ की मीआ़द अब पूरी हो गई सी लगती है इसलिये (तभी तो , तब तो) छोटी सी बात भी इतनी बड़ी हो गई.
(इतनी सी.... तब तो बात अब उतनी हुई.) वर्ना ऐसी छोटी बात को इतनी तूल न दी जाती.
'थी ' करने से ये कहन प्रभावित हो रही है.
शायद स्पष्ट कर सका मैं... सादर.
Comment by shree suneel on July 7, 2015 at 5:10pm
धन्यवाद आदरणीय सुनील प्रसाद शाहाबादी जी.
Comment by shree suneel on July 7, 2015 at 5:07pm
सराहना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय मोहन सेठी जी.
Comment by shree suneel on July 7, 2015 at 5:06pm
धन्यवाद आदरणीय धर्मेंद्र कुमार सिंह जी.
Comment by shree suneel on July 7, 2015 at 5:04pm
आदरणीय राणा प्रताप सर जी, ग़ज़ल पे आपका आना हर्षित कर गया. शे'र पसंद आया आपको, मेरा लिखना सार्थक हुआ आदरणीय. बहुत - बहुत शुक्रिया आपका.
Comment by shree suneel on July 7, 2015 at 4:56pm
सराहना के लिए धन्यवाद आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी. सादर.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 7, 2015 at 11:13am

आदरणीय श्री सुनील भाई , बढिया गज़ल हुई है , हरेक शेर बेहतरीन हैं , दिली बधाइयाँ आपको ।

इस मिसरे में कही आप ये तो नही कहना चाहते हैं   --

इतनी सी तब तो बात अब उतनी हुई.   -   शायद   -- इतनी थी तब तो बात अब उतनी हुई.   ?

Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on July 6, 2015 at 10:20pm
खुबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय।
Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 6, 2015 at 7:12pm

आदरणीय shree suneel जी उम्दा ग़ज़ल के लिये दाद कबूल करें ...सादर 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 6, 2015 at 6:09pm

अच्छा प्रयास हुआ है श्री सुनील जी, बधाई स्वीकारें

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