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नैतिक शिक्षा ( लघुकथा )

" मम्मी , आज तो बहुत आसान टास्क मिला था मुझे स्कूल में ", मन्नू बोला ।
" अच्छा , क्या था , जरा मैं भी सुनूँ "।
मन्नू ने चहकते हुए कहा " घर की सबसे यूज़फुल और सबसे यूज़लेस चीज़ लिखना था "।
" सबसे यूज़फुल तो आप ही हो मम्मी "|
" और सबसे यूज़लेस चीज़ तो आपने कितनी बार बताया है ", दरवाजे पर स्तब्ध खड़े दादाजी अपनी उपयोगिता समझ गए थे ।
मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on June 13, 2015 at 12:00pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया शशि बंसल जी , आपकी रचना से प्रेरित होकर इसे लिखने की इच्छा हुई..

Comment by shashi bansal goyal on June 13, 2015 at 11:02am
वाह आदरणीय विनय जी बहुत सही लिखा है । बच्चे जैसे घर में देखते सुनते हैं वैसे ही संस्कार पाते हैं । हृदय को छूती इस खूबसूरत रचना पर बधाई आपको ।

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