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ग़ज़ल -- मुझको सुकून-ए-दिल किसी दर पर नहीं मिला ( बराए इस्लाह )

२२१-२१२१-१२२१-२१२

दिल जिस से आशना हो वो मन्ज़र नहीं मिला
मैं तिश्नालब ही रह गया, सागर नहीं मिला

पथरीले रास्तों पे ही चलता रहा हूँ मैं
सफ़रे हयात में मुझे रहबर नहीं मिला

अपनी बुराइयों से यूँ अन्जान हूँ अभी
मैं खुद से एक बार भी खुलकर नहीं मिला

बुझते दियों को शब्दों से रोशन जो कर सके
महफ़िल में ऐसा कोई सुखनवर नहीं मिला

साहिल पे ही तू बैठ के क्या सोचे ए बशर
मेहनत बिना किसी को भी गौहर नहीं मिला

इसकी तलाश में हूँ मैं सदियों से दर-ब-दर
मुझको सुकून-ए-दिल किसी दर पर नहीं मिला

मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 27, 2015 at 8:22pm

अपनी बुराइयों से यूँ अन्जान हूँ अभी
मैं खुद से एक बार भी खुलकर नहीं मिला .. बहुत खूब ! 

दाद  कुबूल कीजिय भाई दिनेश जी..

Comment by Madan Mohan saxena on May 20, 2015 at 2:55pm

अपनी बुराइयों से यूँ अन्जान हूँ अभी
मैं खुद से एक बार भी खुलकर नहीं मिला

Comment by दिनेश कुमार on May 20, 2015 at 5:58am
हौसला अफ़्जाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सुनील साहब।
Comment by दिनेश कुमार on May 20, 2015 at 5:57am
हौसला अफ़्जाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय निलेश सर जी।
Comment by दिनेश कुमार on May 20, 2015 at 5:56am
हौसला अफ़्जाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गोपाल नारायण सर जी।
Comment by दिनेश कुमार on May 20, 2015 at 5:55am
हौसला अफ़्जाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय krishna mishra 'jaan'gorakhpuri साहब
Comment by दिनेश कुमार on May 20, 2015 at 5:53am
हौसला अफ़्जाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय वीनस केसरी सर जी।
Comment by दिनेश कुमार on May 20, 2015 at 5:52am
हौसला अफ़्जाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय भाई मिथिलेश जी।
Comment by दिनेश कुमार on May 20, 2015 at 5:49am
हौसला अफ़्जाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय हरि प्रकाश जी।
Comment by दिनेश कुमार on May 20, 2015 at 5:48am
हौसला अफ़्जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गिरिराज सर जी।

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