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अतुकांत कविता : हिंसा (गणेश जी बागी)

मारते हो पशु
फैलाते हो हिंसा
'नीच' जाति के हो न
असभ्य कहीं के
कभी नहीं सुधरोगे
इतिहास गवाह है...


मारते तो तुम भी हो
'शिकार' के नाम पर
तुम तो 'नीच' न थे
याद है ?
वो शब्द भेदी बाण
जो असमय वरण किया था
अंधों के पुत्र का,
भागे थे हिरण के पीछे
चर्म चाहिए था न
इतिहास गवाह है...


हिंसक तो तुम दोनों ही हो
एक शौक के लिए
तो दूजा भूख के लिए
हाँ जी हाँ, बिलकुल
इतिहास गवाह है ।

(मौलिक व अप्रकाशित)
पिछला पोस्ट => लघुकथा : सोशल स्टडी

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Comment

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Comment by gumnaam pithoragarhi on February 8, 2015 at 7:40pm

वाह सर जी बहुत   खूब वाह

Comment by khursheed khairadi on February 8, 2015 at 5:58pm

आदरणीय बागी साहब ,उम्दा रचना हुई है |सादर अभिनन्दन |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 8, 2015 at 11:27am

सराहना हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीया सविता मिश्रा जी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 8, 2015 at 11:26am

आदरणीय हरिप्रकाश दुबे जी, आपकी सराहना और उत्साहवर्धन हेतु बहुत बहुत आभार.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 8, 2015 at 11:25am

आदरणीया प्रतिभा त्रिपाठी जी, रचना पर आपकी बहुमूल्य टिप्पणी का स्वागत है, सराहना हेतु बहुत बहुत आभार.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on February 8, 2015 at 10:38am

आदरणीय चोट और कचोट का सुन्दर समीकरण , वाह !!!!!!!!!!! लग गया बाण निशाने पर ...


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 8, 2015 at 10:17am

आदरणीय भाई मिथिलेश जी, जिस मनोदशा के मध्य कविता सृजित होती है यदि उस मनोदशा तक पाठक की पहुँच हो जाय तो वह रचना और रचनाकार दोनों के लिए सम्मान है, आपकी टिप्पणी रचना की आत्मा तक पहुँच कर आयी है, बहुत बहुत आभार आदरणीय. 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 8, 2015 at 10:11am

आदरणीय जीतेन्द्र जी, रचना पर आपकी उपस्थिति और सराहना मन हर्षित कर गयी, बहुत बहुत आभार.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 8, 2015 at 10:10am

आदरणीया राजेश कुमारी जी, आपकी टिप्पणी इस अतुकांत कविता को विस्तार दे गयी, बहुत बहुत आभार.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 8, 2015 at 10:09am

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी, प्रथम टिप्पणी प्रदान कर उत्साहवर्धन करने हेतु हार्दिक आभार.

कृपया ध्यान दे...

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