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गीत ~ उसकी दीवानगी मेँ अब

उसकी दीवानगी मेँ अब मचलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी यादोँ मेँ रह रहकर
युँ जलना छोड दे ऐ दिल ।

जो तेरा हो नहीँ सकता उसे पाने की चाहत क्योँ ।
किसी संगदिल से आखिर तू करे इतनी मुहब्बत क्योँ ।

ये झूठी ख्वाहिशोँ की राह चलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी दीवानगी मेँ अब.............
तमाशे मेँ तेरे पडकर तमाशा हो गया हूँ मै ।
तेरी नादानियोँ से अब परेशाँ हो गया हूँ मै ।

खयालोँ तू उसके अब बहलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी दीवानगी मेँ अब............

झूठी उम्मीद पर अब भी क्योँ अरमानोँ के साये हैँ ।
कि उनका प्यार का उनके सितम भी अब पराये हैँ ।

कि अब गिरता है तो गिर जा सभलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी दीवानगी मेँ अब...........

मौलिक व अप्रकाशित

नीरज मिश्रा

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 12, 2014 at 12:08am

अच्छा गीत.... बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 11, 2014 at 8:21pm

बहुत सुंदर गीत है भाई बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by Meena Pathak on December 11, 2014 at 6:09pm

बहुत सुन्दर गीत ..बधाई आप को 

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