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बरसाती बादल आ ही गए

बरसाती बादल आ ही गए, ठंढक थोड़ी पहुंचा ही गए.

तपती धरती, झुलसाते पवन, ऊमस की थी घनघोर घुटन,

खाने पीने का होश नहीं, 'बिजली कट' और बढ़ाते चुभन

अब अम्बर को देख जरा, बिजली की चमक दिखला ही गए... बरसाती बादल आ ही गए,

सरकारें आती जाती है, बिजली भी आती जाती है,

वादों और सपनों की झोली,जनता को ही दिखलाती है

पर एक नियंता ऐसा भी, बस चमत्कार दिखला ही गए... बरसाती बादल आ ही गए,

अंकुरे अवनि से सस्य सुंड, खेतों में दिखते कृषक झुण्ड.

व्याकुल जो थे उस गर्मी में, पशुओं के देखो सजग झुण्ड,

चहुओर बजी अब शहनाई, कजरी के बोल सुना ही गए... बरसाती बादल आ ही गए,

(मौलिक व अप्रकाशित)

१९.०६.२०१४

जवाहर लाल सिंह 

Views: 763

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 22, 2014 at 9:00pm

आदरणीय श्री गिरिराज भंडारी जी, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 22, 2014 at 8:59pm

आदरणीया सरिता मिश्रा जी, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 22, 2014 at 7:13pm

आदरणीय जवाहर भाई , सामयिक रचना मे सुंदर भाव पिरोये हैं , बहुत बधाई ॥

Comment by savitamishra on June 21, 2014 at 11:20pm

सुन्दर रचना

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 21, 2014 at 1:23pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 21, 2014 at 1:22pm

आदरणीया मीना पाठक जी, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 21, 2014 at 1:21pm

आदरणीय श्री अमन कुमार जी, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 21, 2014 at 1:20pm

आदरणीय श्री गोपाल नारायण साहब, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 21, 2014 at 11:13am

जी सही कहा बरसाती बादल आ ही गए .....समसामयिक रचना ...बधाई आपको 

Comment by Meena Pathak on June 21, 2014 at 8:57am

बहुत सुन्दर ... सादर बधाई 

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