For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नन्हीं सी चिनगारी

निष्प्राण कभी लगता
जीवन
निर्मम समय-प्रहारों से
सूख-बिखरते,बू खोते
सुरभित पुष्प अतीत के.

निश्चेत 'आज' भी होता
भावी शीतल-शुष्क
हवाओं की आहट पाने को.

फिर भी कुछ अंश
जिजीविषा के रहते
गतिमान रखें जो तन को
निरा यंत्र-सा.

जो हेतु बने
दाव,हवन,होलिका के
या अस्तित्व मिटाती
झंझावर्तों में

चिनगारी...
वही एक नन्हीं सी.

द्युतिमान रहूँ मैं भी
हों तूफान,थपेड़े
या ग्रहण छाएं
अस्तित्व पर
तुम्हारी तरह
अंतिम श्वास तक.

-विन्दु
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 906

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Satyanarayan Singh on May 23, 2014 at 5:04pm

सुन्दर भावों को संजोये रचना सुंदर लगी हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीया 

Comment by Madan Mohan saxena on May 19, 2014 at 5:04pm

हार्दिक बधाई ,बहुत सुन्दर

Comment by Vindu Babu on May 18, 2014 at 9:29pm

आदरणीया राजेश दीदी,

आपका बहुत स्वागत है ब्लॉग पर।

आप आयीं..मेरा मनोबल बढा।

अनुमोदन और सराहना करती हुई आपकी टिप्पणी से अनुग्रहित हूँ महोदया।

आपका हार्दिक आभार।

सादर

Comment by Vindu Babu on May 18, 2014 at 9:25pm

आदरणीया महेश्वरी जी:

:) पुनः!

पुनः शुक्रिया आपको।

सादर

Comment by Vindu Babu on May 18, 2014 at 9:24pm

आदरणीय सौरभ सर;

सादर नमस्ते।

आपकी प्रतिक्रिया ने रचना का बहुत मान बढ़ाया है।

टंकण दोष दूर करने का प्रयास करूंगी।

आपके विचार रचनाकर्म को पुष्ट बनाते हैं...इन्हें अपुष्ट न कहें।

स्नेह बनाये रखें आदरणीय।

सादर आभार आपका।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 18, 2014 at 12:39pm

हताशा ,निराशा फिर आशा तीनों चरणों से गुजरती मन की सम्वेद्नाओ को बहुत सुंदरता से शब्दों में पिरोया है मुझे बहुत पसंद आई आपकी ये रचना शायद आपको पहली बार ही पढ़ रही हूँ ... देर से पढने का खेद है बहुत बहुत  बधाई आपको विन्दु जी..

Comment by Maheshwari Kaneri on May 17, 2014 at 4:09pm

बहुत सुन्दर .... हार्दिक बधाई विन्दु जी...

Comment by Vindu Babu on May 17, 2014 at 2:12pm

अदारेया मीना दी:

आपकी प्रतिक्रिया पुनः मिली...अच्छा लगा।

सादर आभार आपका।

Comment by Vindu Babu on May 17, 2014 at 2:10pm

आपको भी बहुत शुक्रिया आदरणीय जीतेन्द्र जी।

आपने सम्वेदनाओं के प्रवाह को समझा...इसके लिए आभारी हूँ।

सादर

Comment by Vindu Babu on May 17, 2014 at 2:08pm

आदरणीया महिमा जी:

बहुत दिनों बाद आपका आना हुआ!

आपकी उपस्थिति से मन बड़ा प्रसन्न हुआ।

सराहना के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।

सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
12 hours ago
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
yesterday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service