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युवा भारत
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उमंग से भरे चेहरे
पल होंगे तभी सुनहरे
मिले दिशा जब उस ओर
होती है जिधर से भोर
खिलती कली खिलती धूप
बहती नदी खिलता रूप
उन्मुक्त हो गगन उड़ान
नारी स्वयं की पहचान
सफल होय जीवन अपना
शेष रहे न कोई सपना
गीत मिल वो गुनगुनाएं
आओ सब स्वर्ग बनायें
प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा
मौलिक /अप्रकाशित

Views: 699

Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 31, 2014 at 7:29pm

आदरणीय श्री जितेन्द्र जी 

आपका प्रोत्साहन सदैव मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है 

सादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 31, 2014 at 7:28pm

आदरणीय श्री शिज्जू शकूर सर जी 

सादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 31, 2014 at 7:27pm

आदरणीय श्री नीर जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 31, 2014 at 7:25pm

आदरणीय श्री ओम प्रकाश जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 31, 2014 at 7:24pm

आदरणीया कल्पना जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 31, 2014 at 7:23pm

आदरणीय मयंक जी 

सादर 

बहुत ज्यादा नही 

आभार 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 14, 2014 at 10:10am

बहुत सुंदर सार्थक सन्देश देती रचना, हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 13, 2014 at 11:07am

आदरणीय प्रदीप कुशवाहा सर बहुत अच्छी संदेश देती रचना है बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by Neeraj Neer on March 12, 2014 at 8:28pm

बहुत सुन्दर संदेशप्रद रचना .. 

Comment by Omprakash Kshatriya on March 12, 2014 at 7:44am

खिलती कली खिलती धूप 
बहती नदी खिलता रूप .................सरस .

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