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आत्मा अमर है
जीवन नश्वर है

संसार कुरक्षेत्र
जीवर समर है

कल क्या होगा,
किसे खबर है ?

ज्ञान ही अमृत
अज्ञान ज़हर है

श्रद्धा से देख तू
कण-२ ईश्वर है

मुकेश इलाहाबादी ---

(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by MUKESH SRIVASTAVA on May 2, 2014 at 9:09pm

shukriaa Amod Kumar Srivastava

Comment by Amod Kumar Srivastava on May 2, 2014 at 7:33pm

सुंदर अभिव्यक्ति ... बधाई स्वीकार करें ... 

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on May 2, 2014 at 6:47pm

BAHUT BAHTU SHUKRIAA - HAUSLAA AFZAAEE KE LIYE -  Giriraj jee


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 11, 2014 at 9:49pm

सुन्दर रचना , आदरणीय मुकेश भाई , बधाई ॥

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on March 11, 2014 at 12:12pm

bahut bahut shukriaa Akhilesh Krishna jee & Meenaa Dhar jee is hauslaa aafzaaee ke liye

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on March 10, 2014 at 7:07pm

आदरणीय मुकेश भाई,

 अच्छी रचना , हार्दिक बधाई 

Comment by Meena Pathak on March 10, 2014 at 11:33am
Bahut sundar .. Badhai aap ko

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