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पाँच दोहे : आज के मन-भाव // --सौरभ

मन के सुख-दुख, पीर भी, कैसे पायें भाव
टिप-टिप अक्षर आज के, टेक्स्ट हुए बर्ताव       

चिट्ठी से तब भाव मन, होता था अभिव्यक्त
दिल के आँसू वाक्य थे, शब्द-शब्द थे रक्त

वह भी अद्भुत दौर था, यह भी अद्भुत दौर
’अब’ कार्डों से भाव सब, ’तब’ अमराई बौर

हृदय धड़कता आज भी, टेरे भाव महीन  
पर संप्रेषण हो गया, ’यू नो.. आई मीन..’

चला गया जो दौर वो, रह-रह करता हॉण्ट ..
कागज मोनीटर हुए, अक्षर सारे फ़ॉण्ट ..

***************

-सौरभ

***************

(मौलिक व अप्रकशित)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 28, 2014 at 11:05pm

इस प्रस्तुति को मान देे के लिए सुधीजनों को हार्दिक धन्यवाद

सादर

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on March 31, 2014 at 5:22pm

हृदय धड़कता आज भी, टेरे भाव महीन  
पर संप्रेषण हो गया, ’यू नो.. आई मीन..’

अरे गजब सर......ये हिन्दी - अंग्रेजी का दोहे में प्रयोग....... कमाल का हुआ........ नाऊ ये दिल मांगे मोर :)

Comment by ram shiromani pathak on February 8, 2014 at 12:19pm

वाह क्या कहने आदरणीय सौरभ जी ,बहुत ही सुन्दर दोहे और वो भी नए स्टाइल में। …………आज कुछ तूफानी करते है????। ।  हार्दिक बधाई आपको 

Comment by बृजेश नीरज on February 4, 2014 at 7:35am

जी आदरणीय मैं यही कहना चाह रहा था!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2014 at 4:21am

आपकी बातों से पूर्णतः सहमत हूँ भाई बृजेशजी.  आपने मेरे इशारे को बखूबी पकड़ा भी है.

वैसे देशज भाषा तो नहीं देशज शब्द कहना था.

भाईजी, देशज शब्दों में कोई कमी या बुराई नहीं है. विचित्र तो तब लगता है जब लोग दोहा लिखने के क्रम में क्रियापद को अनावश्यक रूप से आंचलिक करने लगते हैं. या संस्कृत-प्राकृत-अवहट्ट के शब्दों के व्यामोह में पड़ उनकी प्रासंगिकता को तूल देने लगते हैं. मैं समझता हूँ, आपका भी यही कहना है.

शुभ-शुभ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2014 at 4:20am

बहुत बहुत धन्यवाद, भाई जीतेन्द्रजी.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2014 at 4:19am

आपकी आत्मीयता के प्रति नत हूँ आदरणीय लक्ष्मणधामीजी..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2014 at 4:18am

आदरणीया वन्दनाजी, आपने अभिनव आयाम की अनुभूति की. 

हार्दिक धन्यवाद इन दोहों की सार्थकता को रेखांकित करने के लिए ..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2014 at 4:16am

सादर धन्यवाद आदरणीय गिरिराजभाईजी.. .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2014 at 4:16am

उत्साहवर्द्धन केलिए सादर धन्यवाद आदरणीय लड़ीवालाजी..

सादर

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