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दिल बड़ी अजीब शय है


खुश हो तो
बहकता है
चहकता है
महकता है
उछलता है
मचलता है


टूटता है तो


हो जाता बेदर्द
देता इंतहा दर्द
कर देता सर्द
खो जाता चैन
कर देता बेचैन
हर दिन हर रैन
.......................

मौलिक व् अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Sarita Bhatia on January 31, 2014 at 10:19am

शुक्रिया baidynath जी 

Comment by Sarita Bhatia on January 31, 2014 at 10:19am

आदरणीय ब्रिजेश जी हार्दिक आभार ,मार्गदर्शन करते रहें 

Comment by vandana on January 31, 2014 at 7:08am

बहुत बढ़िया आदरणीया सरिता जी 

Comment by Saarthi Baidyanath on January 30, 2014 at 9:51pm

बहुत बढ़िया लेखन ...सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति कम शब्दों में ! बधाई महाशया !

Comment by बृजेश नीरज on January 30, 2014 at 8:21pm

इस अभिव्यक्ति पर आपको हार्दिक बधाई!

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