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मेरे खोये हुये लम्हात के ग़म को,

हकीकत के सीने में दफ़्न,

कुछ इच्छाओं की

उन धुँधली यादों को,

मेरे सपनों की लाशों को,

अब तक ढो रहा हूँ मैं…

 

कई दफे

ज़िन्दगी करीब से गुज़री,

मगर,

मैं ही जी न पाया..

आज मुझे लगता है

मैंने बहुत कुछ खो दिया,

पहले जो खोया है..

उसे याद कर,

और फिर,

उन्हीं यादों में खोकर,

 

एक लम्बा सफर तय किया,

मगर,

आज मुझे लगा

कि मैं वहीं हूँ!

वहीं हूँ जहाँ से चला था……

 

-मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:46pm

आदरणीया वंदना जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:45pm

भाई नीरज जी हर किसी की अपनी अपनी सोच है, खुद को सही साबित करने के लिये कई दफे ऊटपटांग तर्क दिया जाता है


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:41pm

आदरणीय अखिलेश सर रचना को पसंद करने के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:39pm

आदरणीय अजय शर्मा जी रचना को मान देने के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:38pm

भाई नीरज जी हर आदमी नशे में है और अक्सर अहंकार की रस्सी में खुद को बाँध के बहुत बहुत बड़ी गलती करता है रचना की सराहना के लिये आपका आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:35pm

भाई जितेन्द्र जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:33pm

आदरणीय राज बुन्देली जी रचना को मान देने के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया


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Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:32pm

आदरणीय गिरिराज जी रचना को समय देने के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया


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Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:27pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी आपने रचना के मर्म को समझा और रचना को सराहा आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:25pm

आदरणीया कुन्ती जी आप जैसी रचनाकारों का अनुमोदन हमेशा ही उत्साहवर्धन करता है, सराहना के लिये आपका आभार

कृपया ध्यान दे...

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